ले, आज फिर एक कविता तेरे नाम कर दूँ

2009 September 28
by Munda Sanichari


जब से आये हो जिंदगी में मेरे
चमन को बहारो का मतलब याद आया
दिल कहे, जीवन की ये बगिया तेरे नाम कर दूँ
ले, आज फिर एक कविता तेरे नाम कर दूँ

पूछे है पगली, याद करते हो मुझे
कैसे कहू, हर शब्-ओ-सहर तेरी याद में डूबे है
हर वक़्त जो दिल धडके है तेरी खातिर, उसकी हर शाम तेरे नाम कर दूँ
ले, आज फिर एक कविता तेरे नाम कर दूँ

हर सुबह का आगाज़ तुम्ही से
हर शाम तेरे नाम से ढले
हर जाम से पहले कहू ‘बिस्मिल्लाह’,हर वो जाम तेरे नाम कर दूँ
ले, आज फिर एक कविता तेरे नाम कर दूँ

वो रोये है तो बरसे है बादल इधर भी
हँसे है तो खिले है फूल इधर भी
तेरी हर मुस्कराहट पर,ये मेरी जान तेरे नाम कर दूँ
ले, आज फिर एक कविता तेरे नाम कर दूँ

सन्देश दीक्षित

2 Responses leave one →
  1. 2009 September 28

    Sandesh bhai… another classic poem.. ek baat batao, who is lucky girl jiske naam ye kavita likhi ha… har poem ki koi to inspiration hoti ha :)

  2. 2009 September 30

    Hey koi ….jo apne aapko unlucky kehti hai :P contradictory na !!!

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