उसकी आँखें सवालो जैसी

2009 October 26
by Munda Sanichari

ढूंढता हूँ हर चेहरे में,चेहरा उसका
वो ख्वाबो में भी लगे है,ख्यालो जैसी

मेरे हर लफ्ज़ समझे है,लब पे आने से पहले
फिर क्यों है उसकी आँखें सवालो जैसी

लबों ने ऐसा जादू किया काफिर तेरे
जगे में भी रहे मेरी सूरत,सोनेवालो जैसी

भूल गया ये जहां,उलझ कर जुल्फों में तेरी
खुदा न बना पाया,कडिया तेरे बालो जैसी

कितनी तारीफ तेरे हुस्न की करे ‘शादाब’
वो दैर में बैठा ,हालत पीनेवालो जैसी !!!

2 Responses leave one →
  1. 2009 October 27

    “wo dair me baitha halat peene walo jaisi”……bahot aachaa…….

  2. 2009 October 27

    मेरे हर लफ्ज़ समझे है,लब पे आने से पहले
    फिर क्यों है उसकी आँखें सवालो जैसी

    Hmmm…Nice one! Aankhe hi hoti hain dil ki jubaan. :)

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