सर्द हवा का झोंका…..

2009 October 31
by Munda Sanichari

11सर्द हवा का झोंका आया
साथ पुरानी यादें लाया
जब तेरी गोदी में रख सर
मैं बच्चे से सोया था
तेरे हाथो में हाथ पकड़
याद तुझे मैं कितना रोया था

तेरी आँखों में भी
अश्को की माला बिखरी थी
वो बूँद मेरे चेहरे पर गिर
दिल में कितना गहरा उतरी थी

फिर उस नरम हथेली का स्पर्श
जैसे गम सारे भुला गया
मैं नींद से जागा सदियों का
आँचल में तेरे सुला गया

फिर आँख खुली, और वो वक़्त के मंजर
छीने जिसने जीवन के हर स्वर
खोया हर पल मेरा, हर वो बातें
झूटी सच्ची जाने कितनी फरियादें

पर याद तो तेरी दिल में रहती है
जब सोचूं तेरे बारे में
तो चुपके से वो यूँ कहती है
हूँ साथ तेरे मैं, तेरे अन्दर
फिर क्यों कर तुझको रोना आया
सर्द हवा का झोंका आया …..

2 Responses leave one →
  1. 2009 October 31

    hmmmmmmmmmmm “acchi” hi…per jab tum urdu me likhte ho to wo “bahot acchi” hoti hain……or pata nahi q ye baat sahi lagti hi ki ham bharito ko dukhd ant kabhi aacha nahi lagta(jaise filmo me)………ise parhene se lagta hi ki koi kisi se bichad gya ho…..per jeevan to esa hi hai

  2. 2009 October 31
    Avinash Katara permalink

    फिर आँख खुली, और वो वक़्त के मंजर
    छीने जिसने जीवन के हर स्वर
    खोया हर पल मेरा, हर वो बातें
    झूटी सच्ची जाने कितनी फरियादें
    this is awesome poem bhaiya………

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