ये कैफियत मेरी
January 23, 2012 Leave a Comment
उनके सवाल और ये मशरूफियत मेरी
कौन जाने ,क्यों कर है ये कैफियत मेरी
अब उन तक नहीं जाती है, यूँ सदा-ऐ-दिल
जाने कहाँ वो खुदा और कहाँ इलाहियत मेरी
वो रूठे और एक हफ्र भी ना हो होठो पर
कभी ऐसी भी ना थी, यूँ बे-तबियत मेरी
नहीं आते है मुझे,ये वजा-ऐ-बशर-ऐ-दुनिया
कुछ फितरत-ऐ-इश्क है और कुछ तरबियत मेरी
[मशरूफियत = busyness,कैफियत = Circumstance,सदा = voice, इलाहियत = Divinity,तबियत = dispositon,वजा-ऐ-बशर-ऐ-दुनिया=way to live in the world,तरबियत=Edification]




