Today is mother’s day ..I am rarely believes in these ‘day concepts‘ but somewhere we changes even though we don’t want to be,because the people are changing around.Anyways,I have tried to write something on this topic better to say on the strongest relation,on the best creature of GOD.This is the subject which is tough for me to write upon,I don’t have words to describe it but still I managed to write few lines.The only thing which I want to share is that I was crying whole time while writing this poem …I don’t know why !!!

तू कितनी सुन्दर ,तू कितनी प्यारी है माँ
दुःख सह कर कितने,मेरी जिंदगी सवारी है माँ
खुद गीले में सोयी,मुझको सूखे में सुलाया
मेरी हंसी की खातिर,अपनी हर ख़ुशी को भुलाया
माँ, याद मुझे है आज भी वो पल,जब में पढता था, तू स्वेटर बुनती थी
मैं पढ़ लिख कर कुछ बन जाऊ,इसलिए मेरे साथ रात भर जगती थी
याद है वो दिन,जब अख़बार में मेरा रिजल्ट आया था
आटे से सने हाथो से तूने सीने से मुझे लगाया था
फिर मेरे माथे पर रोली का तिलक लगा, भेज दिया कुछ बनने को
अपने से दूर इस मशीनी दुनिया में,अपने सपने सच करने को
आज भी मेरे कांधे पर, तेरे आंसुओ की नमी है
सब कुछ है मेरे पास माँ, बस तेरी एक कमी है
मखमली बिस्तर है,पर तेरी गोद अखरती है
तेरे आँचल की छाँव को, मेरी आँखें तरसती है
थक चूका हूँ माँ,जीवन की इस भागम भाग से
इस बेसुरे संगीत से,इस नीरस राग से
मुझे तो एक सिर्फ तेरी लोरी सुहाआएगी
तेरी गोद में आकर ही अब मुझको नींद आएगी
मुझे भी मेरे बेटे होने का फ़र्ज़ निभाने दे
तेरे पाक दूध का कुछ तो क़र्ज़ चुकाने दे
एक बार बुला ले माँ,सब कुछ छोड़ चला आऊंगा
तेरे आँचल को छोड़, फिर कभी कही नहीं जाऊंगा
कभी कही नहीं जाऊंगा,कभी कही नहीं जाऊंगा…..