Naya Bharat


independence-day

जून की गर्मी में , सड़क के उस चोराहे पर
नंगे पांव, अधनंगे बदन में
उस बेबस ,लाचार औरत को , क्या तुमने कभी देखा है

वो कभी फूल बेचती ,या गाड़ी पोछती ,
भीख में दिए दो पैसो से सपनो को सेचती,
उसके हाथ में जो बेचने के लिए तिरंगा है ,
क्या उसे , उसका कुछ मोल पता है
वो तो सिर्फ़ जानती है ,की इसे बेचकर वो कुछ पैसे कमाएगी
और अपने कान्हा को , दो वक्त दूध पिलाएगी

और हमारे लिए , हमारे लिए वो तिरंगा ,
10 रुपये में खरीदी हुई एक दया है ,
जो कार के डेस्क बोर्ड पर लहराता रहेगा ,
और किसी पर किए एहसान को दिखता रहेगा

और वो जो दूर उस सड़क के किनारे बेठी है ,
जिसकी आँखों में कुछ लाचारी है , और क्रोध भी है शायद
वो उठ नही सकती ,गर्भवती है शायद ,
लेकिन फ़िर भी वो आज आई है ,
शायद पेट की भूख उसे यहाँ खीच लायी है

लेकिन तभी , तभी वो उठ खड़ी हो जाती है
शायद दर्द अब भूख पर भरी है ,
वो इधर उधर भागती ,
हर आदमी से मदद मांगती
हर गाड़ी को रोकती ,
हर आते जातें को टोकती ,
मगर , ये सब व्यर्थ है ,
क्यूंकि किसी की मदद न करना ही
हमारी मानवता का सही अर्थ है ,
हम तो जानतें है नारी शक्ति पर चिंतन करमा ,
और संसद के बहार खड़े होकर लाठियों से लड़ना

फ़िर भी देव नही कपतें , भूमि भी न रसातल जाती है
आज फ़िर एक यशोदा, कन्हे को सड़क पर ही जन जाती है
आज फ़िर जनम होता है एक नए भारत का ,
एक नई सभ्यता और एक नए ज़माने का !!

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4 thoughts on “Naya Bharat

  1. जून की गर्मी में , सड़क के उस चोराहे पर
    नंगे पांव, अधनंगे बदन में ………..
    उस बेबस ,लाचार औरत को , क्या तुमने कभी देखा है …..!!!

    maine dekha hai…
    allahabad ke path per
    woh todati patthar….

Your feedback is very important for me ..please leave a comment !!!

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