कैसे कहूँ के कितनी मोहब्बत है


Love45454
कैसे नुमाया करूँ मेरे दिल के ये जज्बात
वो लफ्ज़ ही न बना पाया,जुबान बनाने वाला
[जुबान=language]

कैसे कहूँ के कितनी मोहब्बत है मुझको तुमसे
बस जानता हूँ के मुद्दतो में मिलता है, इतना चाहने वाला

पूछे है वो,इश्क की वजह रोज मुझसे दो चार
काफिर !! आज भी समझे है मेरा प्यार, वो ज़माने वाला

पास हूँ तो बीते है सदिया, लम्हों में मेरी
काश मिल जाये मुझको वो गुर, वक़्त चुराने वाला

मुस्कुराया तो बहुत मेरा सनम, ज़माने भर में
भाये है उसका मुझे हसीं अंदाज, वो रुलाने वाला

क्यों परेशां है ‘शादाब’, वस्ल की खातिर
तू खुदा तो नहीं,अहले-मुहब्बत को मिलाने वाला
[वस्ल=meeting,अहले-मुहब्बत=lover]

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2 thoughts on “कैसे कहूँ के कितनी मोहब्बत है

  1. din-b-din tumhari in poems ko parthi jati hu or tumhari likhne ke andaz or mahusus kar pane wali in kavitawo ki fan banti ja rahi hu……….agar tumne koi book likhi to ek copy mere liye reserve karna….

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