प्यार – एक निरंतरता


कितनी चम्मच शक्कर डालू चाय में ? उसने गीले बालो को अंगुलियों से कान के पीछे करते हुए कहा
बस एक बार अपने होठो से छू लो,शक्कर की क्या जरुरत है ? मैंने हँसते हुए बोला
तुम ना,बिलकुल नहीं बदले हो ….वही हो 15 साल पहले वाले हाई स्कूल लवर …..कुछ तो नया सीख लेते – सामने वाली कुर्सी पर बैठते हुए वो बोली
सच में कुछ नहीं बदला,सब कुछ वैसा ही है 15 बरस पहले वाला,वही वादियाँ,वही पहाड़,वही जगह,वही सुबह,वही सर्दी की सुनहरी धूप,वही प्यार,वही एहसास,वही आँखें,वही मुस्कान…..कुछ नहीं बदला,कुछ भी तो नहीं I
शायद जो चीज़े शुद्द होती है,समय के साथ नहीं बदलती,तभी न जाने कितनी इमारते आज भी वैसे के वैसे खड़ी हुई हैं कितने मौसम आये और चले गए लेकिन वो आज भी समय को दोखा दे रही है …सोचते हुए मैं अपने ही ख्यालो में खो गया
हे सोना ! क्या हुआ ? किसकी यादो में खो गए हनी …कौन है ? उसने शरारती स्वर में कहा
कुछ नहीं रे,ताजमहल के बारे में सोच रहा था
ताजमहल? मैं सामने हूँ और तुम्हे ताजमहल याद आ रहा है ? वो हँसते हुए बोली
नहीं जाना, जरा सोचो …ताजमहल अभी तक वैसा ही है जैसा सदियों पहले था,वही चमक,वही रोनक,उसके समकालिक कितनी इमारते धूमिल हो चुकी है,कुछ तो कारण होगा ? मेरी आँखों में एक सवाल था,हालाँकि जवाब मुझे पता था ऐसा आज से नहीं 15 सालो से हो रहा था जिन सवालो के जवाब मुझे पता थे,फिर भी उस से पूछता था और ये भी जनता था की वो क्या बोलेगी,शायद सिलिये की सवाल तो सो शरीरो के बीच में थे,पर आत्माए तो सब जानती थी
अरे इसमें क्या है ? जो ईमारत प्यार की बुनियाद पर,विश्वास की ईटो और एहसास के गारो से बनती है अमर हो जाती है – उसकी आँखों में अजीब सी ख़ुशी थी,जैसे कोई बच्चा किसी कठिन से प्रश्न का हल करने के बाद खुश हो जाता है ,कठिन से कठिन बातो को सरल शब्दों में कह जाने की कला शायद भगवान ने उसे देकर भेजी थी,मैं अक्सर कहता था – तुम तो भगवान की बेटी हो
आर्यन तुम और तुम्हारी ये फिलोशफी कभी बंद भी करोगे ? इस बार उसकी आँखों में कुछ शिकायत सी थी उसने अपने हाथ को मेरे हाथ पर रख दिया,जैसे उसे अब इसका जवाब नहीं चाहिए था उसका स्पर्श आज भी उतना ही नया था जो आज से बरसो पहले था उसकी छुहन दिल तक जाती थी जिस्म में एक मीठी सी लहर हिलोरे लेना शुरू कर देती थी
चलो चलो ,छोडो ये सब
आज का क्या प्लान है,ये तो बताओ – मैंने बात बदलते हुए कहा
प्लान तो है तुम्हारी बाँहों में बैठकर पूरा दिन बिताने का,पर सोचती हूँ पहले जाके उस कान्हा से मिल आऊं जिसने तुम्हे मुझसे मिलाया , कहते हुए उसकी आँखों में समर्पण और भक्ति भाव झलक आया
ओह मंदिर!! मंदिर जाने की सोच रही हो जाना ? बाप रे …..its too cold.नहीं मुझे नहीं जाना इतनी दूर …..तुम तो जानती हो तुम्हारे पास आकर कही जाने का मन नहीं करता – अपने आलसीपन को चाहत से ढकने की कोसिस करते हुए मैंने कहा
चलो उठो भी,बहुत हुए ये फिल्मे डायलोग,सच में तुमसे बड़ा spiritual नास्तिक मैंने दुनिया में नहीं देखा …उसके शब्दों में प्यार भी था और थोड़ी नाराजगी भी …उसकी ये अदा मुझे हमेशा से अच्छी लगती थी,उसके बहुत सारे शब्द जो सिर्फ मेरे लिए ही इजाद हुए थे जैसे spritual horny,passive agressive,virgin सन्यासी …….और भी ना जाने क्या क्या ?
मंदिर जाने की इक्छा मेरे घोर आलसीपन पर हमेशा से भारी पड़ी है वैसे कान्हा से मेरा रिश्ता बहुत पुराना है या ये कहू के दोस्ती सी है ….उनका जनम हुआ सड़क के उस पार जेल में और मेरे सड़क के इस पार हॉस्पिटल में ….मेरी ये सोच. मुझे भगवान् ले और करीब ले आती है I भगवान के प्रति लोगो का विश्वास. भय है या भक्ति कहना बेहद कठिन हैI इस दुनिया में ऐसे बहुत कम लोग है, जो मंदिर भगवान् को उन चीजों के लिए, जो उन्हें बिना मांगे मिला,के लिए धन्यवाद देने जातें हो,वरना तो सारे मंदिर अटे पड़े है मागने वालो से ,किसी को नौकरी चाहिए,किसी को बेटा,किसी को धन ,किसी को कुछ ,किसी को कुछ ….और फिर शुरू होती है सोदेबाज़ी……ये दोगे तो ये करूँगा,वो दोगे तो वो करूँगा…वाह रे मनुज,वाह रे तेरी भक्ति …
अरे अरे सोना,हुआ क्या है तुम्हे?कितना हसीन मौसम है,कब से इन्तजार थे इस पल का ओ…चलो अब उठ भी जाओ,कब तक यहाँ यूँ ही बैठे रहोगे? हाथ पकड़कर वो उठाते हुए बोली
चलता हूँ ना,अब जाना है तो नहाना भी तो पड़ेगा
मैं उठा और थके कदमो से कमरे की ओर चलने लगा,दिसम्बर का महिना,इतनी सर्दी ओर नहाना ….सच में भक्ति आसान नहीं,लेकिन अब क्या ? उसकी किसी बात से इनकार करूँ ये भी तो मुमकिन नहीं.कमरे में लताजी का गाना बज रहा था …मोरा गोरा अंग लई ले, मोहे श्याम रंग दई दे …!!!
सुबह के १० बज चुके थे,पहाड़ो की बर्फ,धरती की धुंध के साथ मिलकर सूरज की गर्मी से लड़ने की कोशिश कर रही थी ओर शायद जीत भी रही थी.कमरे की खिड़की से झांकती हुयी बर्फ दिल को भा रही थी .असल में हमें चीजों का एहसास तब होता है जब या तो वो हमारे पास होती नहीं है या फिर बहुत कम होती है.लेकिन प्यार एक ऐसी चीज़ है जो जितनी ज्यादा हो उतनी ही कम हो जाती है,शायद इसलिए की प्यार की कोई परिभाषा नहीं होती बरसो की मोहब्बत के बाद भी कहना मुश्किल है की प्यार क्या होता है, बड़े स्वार्थी है वो लोग जो प्यार को परिभाषित करते है
वो कमरे के कोने में रखे ड्रेसिंग टेबल के सामने खड़ी थी,उसके खुले भीगे बाल आज भी आकर्षित कर रहे थे .
क्या कर रही हो? मैंने धीरे से पीछे जाकर उसे अपनी बाहों में भर लिया
तुम्हे पता है? वो इससे आगे कुछ बोल पाती मैंने कहा – हाँ,सब पता है ? कहना जरुरी है?
ऐसे कैसे होता है? तुब सब बिना कहे कैसे जानk लेते हो ? काला जादू जानते हो ना – वो हँसते हुए बोली
नहीं रे,तेरे अंदर ही तो हूँ मैं-कहते हुए मैंने अपने होठो से उसकी गर्दन को छू लिया,वही सवेंदना,वही एहसास,वही गर्माहट,वही सांसे,वही मदहोशी….कुछ भी तो नहीं बदला
छोडो भी,ये वक़्त है रोमांटिक होने का,पलटकर अपने दोनों हाथो को उसने मेरे गले में डाल दिया
आज भी इतना प्यार करते हो ? क्यों करते हो ? बोलो बोलो -उसने हँसते हुए कहा.शब्द मुहं से तो निकले थे पर उनका कोई सार्थक मतलब नहीं था.कुछ सवाल ऐसे होते है जिनका वास्तव में कोई जवाब नहीं होता,शायद वो सवाल नहीं होते,बस कहे सवाल के रूप में जाते है …जैसे कोई कहे “I love you”
पहले भी कहा था,आज भी वही जवाब है ….नहीं पता,बस हो गया.अब तुम इसे true love कहो, plutonic कहो, mystiq कहो ,मेरे लिए तो प्यार है बस प्यार-कहते हुए मैं पास में रखे सोफे पर जाकर बैठ गया
सोना,वक़्त देखा है? – मंदिर जाने की बेकरारी उसे मुझसे दूर खीच रही थी
हाँ, वक़्त देखा,जमाना देखा,दोस्त देखे,रिश्ते देखे…पर तेरे प्यार से खूबसूरत कुछ नहीं है,कुछ भी नहीं
मेरी बात सुनकर वो मेरी गोद में आकर बैठ गयी,उसके गिले बाल मेरे गालो से टकरा रहे थे,कुछ ऐसा एहसास था जैसे बर्फीली हवाए शरीर से टकरा कर मीठी सी लहर जिस्म में गहरे तक छोड़ जाती है
कितना प्यार करती हो मुझसे?बताओ ? – मैंने मस्ती भरे स्वर में पूछा
उसने जवाब होठो से दिया,उसके नर्म सुर्ख होठ मेरी आत्मा से बात करने लगे.किसी ने सच ही कहा है दो आत्माए होठो से ही बात करती है, जब दो लब एक हो जाये, दो सांसे एक साथ बहने लगे, दो दिल एक साथ धडकने लगे,तो दो आत्माओ का मिलन होता है,आज भी उतनी ही बेकरारी,उतने ही बेचैन एहसास,उतना ही प्यार,उतनी ही तपन…सब कुछ पहले जैसा ही नया था.मेरे हाथ जैसे उसके हर अंग को नाप लेना चाहते थे.चाँद निखरता जा रहा था,चांदनी हर तरफ फैलने लगी थी,उसने आँखें मूँद ली थी,बेचैन कुमोदनी जैसे चाँद को देख मचल उठती है चाँद में समां जाने को,गर्म साँसेमेरे अंतर्मन को छूने लगी थी,लहरें उठने लगी थी,ज्वार आज उचाईयां छू लेना चाहता था ,शायद कोशिश में अपने चाँद तक पहुचने की…….बहाब किनारे की तरफ बढ़ रहा था,सारी बाधाओ को तोड़ता हुआ,सब कुछ अपने में समेटता हुआ…सारे जज्बातों को,सारे अहसासों,सारी दूरियों को,सारे प्यार को ….सब कुछ समाता जा रहा था …सब कुछ,सब कुछ,सब कुछ
I love you कहते हुए उसने आँखें खोली…उसकी आँखे प्यार से भरी थी
I know it, कुछ नया बोलो – मैंने मुस्कुराते हुए बोला
कुछ नहीं कह सकती, तुम सब तो जानतें हो ….दोनों एक दूसरे की बाहों में बहुत देर तक लेटे रहे.एक दूसरे की आँखों में आँखे डाले….जैसे दो आत्माएं शारीर बदल चुकी थी,एक नयी सी चेतना नज़र आने लगी थी उसकी आँखों में,साथ में ढेर सारा प्यार,मुझ पर खुद से ज्यादा विश्वाश …होता भी क्यों नहीं,मेरी आत्मा जो थी उसके शारीर में ……

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11 thoughts on “प्यार – एक निरंतरता

  1. hey bhaiya bhot mast hai
    padk seriously maza aa gaya
    pata nahi tha aap itne upar ho
    seriously its grt
    plzz continue ur wriitin skills
    really hats off 2 u n ur storieskeep writtin

  2. kuch rishte duiya ke ho k v yaha ke nahi hote…..jab sharir mayane kho dete hin or srif atmaye baat karne lagti hi,,,,,ya u kahe ki kuch prem bhawanaye is had tak pawitra hone lagti hi ki Ishwar ka ans hone lagen,,,,,,,,,,…ese kisi v rishte me hona hi bas khud me khushkismati hi………

  3. Labz nahi mil rahe tarif karne ko,
    Bas itna samjh lijiye mohabbat se ishq ho gaya…

    Really awesome… honestly speaking, this is blue print of Eternal Love…
    You are privileged…

  4. bahut hi khoobsurat ehsaas hai is article ko padna. beyond the limit of imagination. keep it up sandesh. muje lagta hai pyaar ke ekhsaas ko jitna sunder hindi bhasha mein paribhashit kar sakte hai utna kisi or bhasha men nahi. suchmuch bohut hi khubsoorut hai. thanx

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