प्यार – एक इम्तिहान


तुम मुझे प्यार नहीं करते,तुम्हे मेरी कोई फिकर नहीं,तुम सिर्फ अपने बारे में सोचते हो,अपने घर वालो के बारें में, मेरे लिए तो तुम्हारे पास वक़्त ही नहीं है – प्रीति की आँखों में अजीब से भाव थे,जो इतनी उदासी,इतनी निराशा,इतना बेगानापन.ऐसा अजय ने आखिर क्या किया था ?वो तो सिर्फ चाहता था की अमेरिका जाकर कुछ पैसे कमा ले और फिर बापस आकर पूरी जिंदगी प्यार से बिताये और फिर 6 महीने की ही तो बात थी,इतना समय तो बस पलो में बीत जाता .अजय कभी हाथ में पकडे हुए ऑफर लैटर की तरफ देखता कभी प्रीति की उदास आँखों में.आखिर पैसा भी तो जिन्दगी के लिए जरुरी है.पैसे से इस दुनिया में सब कुछ पाया जा सकता है .और फिर इस तंगहाल जिंदगी को वो कब तक जियेगा.उसे हर चीज़ के लिए सोचना पड़ता है,वही घर से निकल कर लोकल बस का सफ़र,फिर २ किलोमीटर पैदल चलना.हर जगह पैसे की कमी खलती है.अछ्छे होटल में जाने से पहले 10 बार सोचना पड़ता है.वीकेंड आते ही जैसे खामोसी सी छा जाती है.घर पैसे भिझ्वाने के बाद कुछ भी तो नहीं बचता,और घर भिझ्बाना भी तो जरुरी है ,छोटी बहन कि शादी भी है,घर भी बन रहा है,पापा रिटायर हो चुके है …..आखिर उसकी जिंदगी अकेले की ही तो नहीं है. अजय और प्रीति दोनों अलग कोम्पनिएस में कम करते थे.दोनों साथ रहते थे,हालाँकि दोनों की शादी नहीं हुयी थी लेकिन प्यार इतना गहरा था कि एक दुसरे के साथ रहना अब बस मुश्किल सा था.बड़े सहर कि अनदेखी ऐसे रिस्तो को स्वीकार कर लेती है .रोज दोनों एक ही साथ घर से निकलते,एक खाना खाते,एक साथ घुमते,दोनों एक दुसरे का ख्याल रखते,तंगहाल नहीं थी जिंदगी पर फिर भी,मनुष्य कि आगे बदने कि प्रवर्ती उसे हमेशा से कुछ श्रेष्ठ करने के लिए उकसाती रही है.बेहतर जिंदगी कि चाहत इंसान कि सबसे बड़ी शक्ति भी है और सबसे बड़ी कमजोरी भी.
नहीं प्रीति ऐसा नहीं है…जरा सोचो,इतनी बड़ी कंपनी है,कुछ वक़्त उसमें कम करूँगा तो अच्छा अनुभव हो जायेगा,फिर विदेश जाकर कुछ पैसे भी तो बचा लूँगा और हो सका तो तुम्हे भी वह बुला लूँगा और नहीं भी हो पाया तो आ तो रहा ही हूँ ना 6 महीने में.दुबारा बापस आकर एक ख़ुशी जिंदगी शुरू करेंगे .एक फ्लैट ले लेंगे कब तक इस किराये कि माकन में यु ही गुजर करेंगे.हमारे पास सब कुछ होगा.एक फ्लैट,कार,अच्छी नौकरी,और ढेर सारा प्यार – अजय ने प्रीति को समझाते हुए कहा
देखो तुमने पिछली बार भी नहीं जाने दिया था,तुम्हे पता है जो बंदा मेरी जगह गया था आते ही घर ले लिया है.तुम मुझे ना रोकती तो हम भी आज अपने घर में रह रहे होते. आपनी कार होती.कार में मेहँदी हसन कि गजले और तुम्हारे हाथ को अपने एक साथ से पकडे कार चलाता मैं – कहते हुए अजय ने प्रीति के गले में अपनी बाहे डाल दी
छोडो भी,तुम ना अपनी बातो से मुझे मना नहीं सकते – प्रीति कि आँखों में ढेर सारा प्यार छलक आया प्रीति के लिए ,पर वो किसी भी कीमत पर अजय को दूर नहीं जाने देना चाहती थी,प्यार का दूर जाने का एहसास बहुत कठिन है ….वही समझे जिसने ये सहा है
प्रीति सोचो,इतना पैसा,इतनी खुशिया ..सोचो तो ज़रा – अजय को लगा प्रीति मन जाएगी
पैसा? क्या पैसा ही सब कुछ है – प्रीति के चेहरे पर आक्रोश था
पैसा सब कुछ नहीं,पर बहुत कुछ है – अजय ने समझाते हुए कहा
जानती हूँ,पर तुमसे दूर नहीं रह पाऊँगी, मर जाउंगी – कहते हुए प्रीति ने अपना सर अजय के कंधो पर रख दिया
कब जाना है ? प्रीति ने अपने आप को सम्हालते हुए कहा
कल,कल सुबह ही जाना पड़ेगा …..२ दिन बाद तो ज्वाइन करना है – अजय ने प्रीति के माथे को चूम लिया
दोनों ने एक साथ रोज कि तरह खाना बनाया,फिर थोड़ी देर शेर के लिए निकल गए.महानगरो कि सुबह, शाम,रत सब  एक जैसी ही होती है.भीड़ भरी सड़के,सुने सुने दिल,सामानों से लदी दुकाने पर खली होते एहसास…अज पूर्णिमा कि रात थी,चाँद आज पूरे शबाब पर था.पर नियति है के प्रकर्ति कि सारी चीज़े क्रमित होती जाती है  ,चाँद को भी कल से ढलना था….हरिवंश राय बच्चन कि कविता कि कुछ पंक्तिया है ” खोने का दुःख छुपा है,पाने के सुख के पीछे” ..कल से चाँद भी घटता जायेगा ,प्रीति के मन में भी यही भय था ,कही दूर जाकर अजय का प्यार कम ना हो जाये,आसक्ति,लगाव इंसान के सबसे बड़े शत्रु भी है और सुख के सबसे बड़े कारण भी,बढ़ता प्यार दुःख को भी बढाता है,प्रीति कि आँखें नाम थी,दोनों बोना बोले चले जा रहे थे …कुछ कदम आगे ही घर था
बिना कुछ बोले दोनों घर लौट आये
प्रीति कल सुबह जल्दी जाना है और फिर कुछ त्यारिया भी करनी है,ऐसा करो,तुम सो जाओ
बहुत बार शब्द अपने भावार्थ खो जाते है,अजय कि बात में प्रीति कि प्रति प्यार था,पर प्रीति ने उसे अपने ही ढंग से लिया,गलत वो भी ना थी.पर इस बात को आगे बढ़ाना नहीं चाहती थी इसलिए दिवार कि तरफ मुह करके लेट गयी.कहते है सच्चे प्यार में भगवान होते है,अजर प्रीति के मन कि बात भाप गया था.हाथ में पकडे बैग को जमीन पर रखकर वो प्रीति के पास जाकर बैठ गया और अपना हाथ प्रीति के सर पर रख दिया.कान में जाकर धीरे से कहा – पागल तू ही तो मेरी हिम्मत है ,तू ही ऐसे करेगी तो …..कहते हुए अजय ने प्रीति को चूम लिया.प्रीति कि उम्र कोई 22-23 साल थी.जवानी में बढती उम्र के साथ एहसास भी बढ़ते जाते है.दोनों १ साल से साथ रह रहे थे पर कुछ चीज़े अभी भी दूरिया बनाये हुए थी.पर आज जैसे बढ़ने वाली दूरी,नजदीकिया ला रही थी
तुम नहीं जानते,तुमसे कितना प्यार करती हूँ ….एक पल नहीं जी पति तुम्हारे बिना और 6 महीने – कहते हुए प्रीति कि आँखों में आंसू छलक आये
अरे मेरी प्रीति इतनी कमज़ोर? प्रीति के आंसू पोछते हुए अजय ने कहा
प्रीति और अजय आज तक इतने करीब नहीं आये थे ,हालाँकि दोनों एक दुसरे को 2 साल से जानते थे और करीब १ साल से एक साथ रह रहे थे.प्रीति कि सांसे अजय के चेहरे से टकरा रही थी.उसके सुर्ख होठो पर आंसू कि बूनसे ऐसे लग रही थी मनो सर्दी कि सुबह में गुलाब कि पंखुदियो पर उस कि बूंदे जमी हो …अजय ने अपने होठो से उन बूंदों को सोख लिया,ऐसा पहली बार नहीं हुआ था लेकिन आज कुछ अलग एहसास थे.दुःख और सुख एक साथ हो तो इंसान कुछ समझ नहीं पाता.पूरा चाँद,सर्दी कि रात,दो प्रेमी और असीमित प्यार,जैसे सारी कायनात उनके चारो और अपनी खुशिया लुटा रही थी ,दोनों आज एक दुसरे को अपना सर्वश दे देना चाहते थे,जब मन मिल जाये,विचार मिल जाये तो तन मायने नहीं रखता.दोनों एक दुसरे में समां जाना चाहते थे
आज तन भी मिल चुका था ..कुछ भी शेष नहीं बचा था,कुछ भी नहीं ,कुछ भी नहीं अजय के माथे पर पसीने कि बूंदे जैसे उसके बिछुड़ने के दर्द को धो रही थी
इतने दूर जा रहे हो,मुझसे दूर मत चले जाना -प्रीति कि बातो में मासूमियत थी अजय ने प्रीति को चूम लिया,जाने कहा देती हो ? मेरे दिल को तो पकड़ कर रख लिया है तुमने – अजय ने हँसते हुए कहा,रात का अँधेरा बढ़ता जा रहा था,प्रीति के लिए जैसे समय भागता जा रहा था.वो समय को रोकना चाहती थी .चाहती थी कि सुबह आये ही ना,अजय सो चुका था पर प्रीति कि नज़रे अभी भी अजय के चेहरे से टकरा रही थी.जाने कब आँख लग गयी पाता ही ना चला
उठो प्रीति,६ बज गए है,चलो चाय पी लो – अजय ने चाय का कप प्रीति के पास रखतें हुए बोला
तुम तैयार भी हो गए,मेरी तो आँख ही नहीं खुली – प्रीति ने चेहरे से रात को आये ख्यालो को हठाते हुए कहा
चलो चलो ,अब उठ भी जाओ,मुझे थोड़ी देर में निकलना है – अजय प्रीति को दुबारा उन ख्यालो में नहीं जाने देना चाहता था
प्रीति उठी,तैयार हुयी,अजय के लिए नास्ता बनाया,
मैं भी चलूंगी तुम्हे छोड़ने- प्रीति अजय के साथ एक एक पल को जी लेना चाहती थी
नहीं रे,मुझे यहाँ से ऑफिस जाना है,वह कुछ काम है और फिर ऑफिस कि गाड़ी से ही एअरपोर्ट निकल जाऊंगा ,वैसे ही इतना दूर है एयरपोर्ट ,तुम रहने दो – अजय प्रीति को उस बिछडाव के दर्द से बचाना चाहता था
अजय,पता नहीं क्यों मुझे ऐसा लग रहा है जैसे तुम मुझसे बहुत दूर जा रहे हो – कहते हुए प्रीति कि आँखों में आंसू छलक आये
अरे पागल,ऐसा नहीं है,तेरे पास ही तो हूँ ,तेरे अंदर – अजय ने प्रीति के सर को चूम लिया
चलो चलो ,अब में चलता हूँ ,तुम अपना ख्याल रखना और कोई भी बात हो मुझे बता देना,मैं रोज फोन करूँगा तुम्हे -कहते हुए अजय ने अपना सामान उठाया और चलने लगा
अजय,एक मिनट रुको… I love you ..कहते हुए प्रीति अजय के गले से लिपट गयी,जैसे उसे जाने नहीं देना चाहती थी,इस बार अजय भी आंसू नहीं रोक पाया,दोनों एक दुसरे कि बाहों में रोते रहे.
चलो अब मैं चलता हूँ ,कहते हुए अजय ने दरवाजा खोला.प्रीति भी पीछे पीछे दरवाजे तक आ पहुंची.अजय ने पीछे मुड़कर नहीं देखा शायद प्रीति कि भीगी आँखों को नहीं देख सकता था.बल्कि प्रीति का मन कह रहा था कि एक बार तो उसे देखे …धीरे धीरे अजय,प्रीति कि आँखों से ओझल होता जा रहा था और किसे पाता था कि उसकी जिंदगी से भी
अजय न्युयोर्क पहुँच चुका था,2 सप्ताह भी बीत चुके थे.रोज रात प्रीति से फोन पर बात होती थी.प्रीति अकेली हो चुकी थी,इतने बड़े शहर में कोई उसका अपना ना था,पर अजय कि यादें उसे सहारा देती थी और शायद जिंदगी जीने का एक मकसद भी.बढ़ता काम का भोझ अजय के समय को काम कर रहा था,अब बातें काम होती थी पर प्यार उतना ही था और शायद बढ़ भी गया था.अजय कि आँखों में सुनहरे भविष्य के सपने थे ,अपना घर,अपनी गाड़ी,अच्छी नौकरी और ढेर सारा प्यार …और क्या चाहिए था उसे .अजय बहुत मेहनत करने लगा था,ऑफिस से काफी प्रोह्त्सान मिल रहा था.सब कुछ अच्छा चल रहा था,समय जैसे अपनी रफ़्तार पकड़ चुका  था.सब कुछ अच्छा चल रहा था,बस फर्क आ रहा था बस प्रीति कि बातो में.जिन बातो में प्यार होता था,उनमें अब सिर्फ कुछ घर कि बातें,कुछ नौकरी कि और कुछ इस दुनिया की बातें ही रह गयी थी.जो दुनिया दोनों ने अपने लिए बनायीं थी जैसे धीरे धीरे खत्म सी होती जा रही थी.अपनी मसरूफियत में वो प्रीति के बदलते स्वाभाव को समझ नहीं पा रहा था.काम होती बातें दूरिया बढाती जा रही थी.एक दिन प्रीति का फोन नहीं आया.जब अक्सर अजय ऑफिस से बापस आता तो प्रीति से बातें करता था.आज २ साल में पहली बार हुआ था कि अजय ने प्रीति से बात नहीं की.आज अजय ने कुछ खाने को भी नहीं बनाया था,बस बिस्तर पर लेते लेते सोच  रहा था.कही कुछ हो तो नहीं गया उसे,इतने बड़े शहर में अकेली रहती है,कही कुछ हो गया तो अपने आप को माफ़ नहीं कर पायेगा,कही उसका मोबाइल तो चोरी नहीं हो गया,कही अपने घर तो नहीं चली गयी,पर उसे बिना बताये तो नहीं जाएगी ..जाने ऐसे कितने ख़यालात उसके दिमाग में आ रहे थे रात कब गुज़र गयी उसे पता ही नहीं चला
अजय की मसरूफियत,प्रीति को अजय की बेबफाई लग रही थी.इंसान अपने मन को नहीं समझा पता और दूसरे के मन को समझाना …..प्रीति ने अब अजय की ही कम्पनी ज्वाइन कर ली थी,अजय ही ने ये सब करवाया था,ताकि जब बापस आये तो दोनों एक साथ ऑफिस जा सके,एक साथ ही काम करे और ऐसे कितना वक़्त मिल जायेगा एक दूसरे के साथ रहने का आज फिर प्रीति का फोन नहीं आया,और ना ही उसने अजय का फोन उठाया,अजय आज कल से ज्यादा परेशान था.प्रीति का कोई दोस्त भी नहीं था जिस से पूछ ले की वो कहा है,क्या हुआ है ,आज की रात भी बिना कुछ खाए निकल रही थी….अजय ने अपनी कम्पनी के दोस्त से बात की,पता चला की प्रीति रोज ऑफिस आ रही है,फिर ऐसा क्या हुआ है,कही उसने कुछ गलत तो नहीं बोल दिया ….सब कुछ ठीक तो है ?
सब कुछ ठीक नहीं था,कुछ बहुत ज्यादा और जल्दी बदल रहा था प्रीति से बात किये बिना अजय नहीं रह पा रहा था.ना तो काम में मन लग रहा था ना खाने पीने का ही होश था.10 दिन में वो शारीर से आधा हो चुका था. नहीं,बस अब और नहीं …मैं अब यहाँ नहीं रह सकता,उस पैसे का क्या करूँगा जब प्रीति ही साथ नहीं होगी.उसे तो पता ही नहीं की प्रीति को क्या हुआ है,कही उसके घरवालो ने कही ………..नहीं,ये तो नहीं हुआ होगा ,अजय के मन में जैसे विचारो के तूफान आ रहे थे.अगले दिन अजय ने ऑफिस जाकर इस्तीफा दे दिया,किसी से कुछ नहीं बोला,सामान बंधा और अगली ही उडान से अपने देश लौट चला,प्यार में बहुत शक्ति होती है,जब वो दिल में होता है तो सब कुछ आसान  हो जाता है

२ दिन का सफ़र,प्रीति की चिंता,गिरती सेहत…जैसे अजय की परीक्षा ले रही थी. आदमी का असली इम्तिहान दुःख के समय में होता है,अजय काफी हिम्मत वाला बंदा था,पर दिल कमज़ोर हो जाये तो हिम्मत भी जवाब दे देती है .अजय भारत पहुँच चुका था.दिल में हजारो सवाल लिए ऑटो में बैठ घर की तरफ बढे जा रहा था.आज रविवार है प्रीति घर पर ही होगी,देखतें ही गले लगा लेगी,कितना रोएगी.कितना दतेगी,कितना प्यार करेगी …अजय की आँखें तरस गयी थी प्रीति को देखे हुए.आखिर अजय घर पहुंचा.घर पर ताला लगा था.२ दिन का थका वह घर के नीचे ही बैठ गया,जनता था प्रीति का कोई और दोस्त तो है नहीं .कही आसपास ही गयी होगी आ जाएगी थोड़ी देर में …..पास की दुकान पर ही चाय पी और एक सिगरेट भी जला ली जिसे वो शायद उसने २ साल पहले छोड़ दी थी,प्रीति ने अपनी कसम दी थी ..पर आज ना जाने क्यों वह अपने आप को रोक नहीं पाया,शायद कोई ईश्वरीय शक्ति थी जो उसे ऐसा करवा गयी थी
इन्तजार को ४ घंटे हो चुके थे ,शाम ढलने लगी थी,अँधेरा बढ़ रहा था ,तभी अचानक एक कार आकर रुकी,इस कार को तो अजय जानता था,उसके दोस्त राहुल की ही तो थी.तभी कार का गेट खुला,एक लड़की उतरी,अँधेरा बहुत था अजय ढंग से नहीं देख पा रहा था.पर शायद वो प्रीति ही थी ..हाँ प्रीति ही तो थी,तभी राहुल कार से उतरा और प्रीति को चूम लिया …….अजय के लिए जैसे दुनिया ही खत्म हो चुकी थी.लेकिन अपने आप को सम्हालते हुए वो आगे बढ़ा जैसे शायद वो अपनी आँखों को धोका देना चाहता था,नहीं प्रीति ऐसा नहीं कर सकती थी ….वो तो इतना प्यार करती थी उस से ….हाथ में सिगरेट सुलग रही थी और तन में दिल ……प्रीति ने अजय की तरफ देखा और फिर जलती सिगरेट को ,जैसे कोई उसकी चिता सुलगा रहा हो …….दोनों एक दूसरे से कुछ ना बोले,बोलतें भी क्या ……
अजय ने अपना बैग उठाया और चलने लगा उस राह पर,जो जिंदगी उसे दिखा रही थी ….मन में अपने अधजले प्यार को लिए,शायद अब किसी पर विश्वास नहीं कर पायेगा,अपने पर भी नहीं …..
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4 thoughts on “प्यार – एक इम्तिहान

  1. …touching!!d stories widout ending alws intrigue me…u got a unique style of telling stories..i felt as if i m sitting in front of u nd u r actually speaking to me…:)u r talented yaar!!!

Your feedback is very important for me ..please leave a comment !!!

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