चलो आज खुद पर कुछ लिखतें है…..


I am in lite mood today …..was thinking abt my past life,I come from a very very conservative and religious family.My grand father was Mehant of famous Dhwarikadhish temple in Mathura.It can give u a thot dat wat restriction I had to enter in dis real world(real???)…….Today I m thinking ….how the change happened,How a brij ka lal converts to natwar lal [:D]….. how spirituality converts into practicality…..how yog converts to bhog:P ……hey chaps,y r u so serious..abey main nahi hua jindagi mein tum kahe 😛 ……chalo ,let me giv it a shot

चलो आज खुद पर कुछ लिखतें है
दुनिया को तो बहुत पढ़ा
कुछ अपने को भी पढ़ते है

तो फिर ले हरि का नाम “संदेशोपरायण” प्रारंभ करते है
गलती से प्रथ्वी पर आई,इस भूल का आरम्भ करते है
बहुत सारे chapter है इसमें
एक चेहरे के multi character है इसमें
इसमें ज्योतिष भी है कवि भी है
अँधेरे को चीरती एक छवि भी है
ये हँसाता भी है,ये रुलाता भी है
कभी कभी ज्ञान की बातें बताता भी है
ये दुनिया घूमता है ,ये फोटो खीचता है
विचारो के हल से,बंजर दिमाग को सींचता है
ये पागल लोगो के लिए dear है
गलती से बना एक इंजिनियर है
इन्हें degree देकर college रोता है
क्या देश में इतना बड़ा फर्जीवाडा भी होता है
खैर छोडिये साहब,अब काहे पोल खोले
बाढ़ आ जाएगी,काहे hole खोले

शुरुआत जन्म से करते है
पिछले जन्म में किये अच्छे कर्म से करते है
पावन धरती मथुरा के पुण्य कुछ ज्यादा थे
देवता इसे स्वर्ग बनाने पर आमादा थे
फिर GOD ने सोचा के चलो कुछ नया present करते है
ऐसे तो public बोर हो जाएगी,इसी को sent करते है
कान्हा और इनके जन्म में सिर्फ एक सड़क का फासला था
ये सड़क के इस पार hospital में अवतरित हुए ,उन्हें देवकी ने उस पार पाला था
ब्रज का होने का इन्हें बहुत बड़ा भोकाल है
कान्हा समझते है अपने को,पर गोपियों का अकाल है
बांसुरी बजाते है ,लोगो को नचाते भी है
खाते खूब है,फिर भांग से पचाते भी है
बचपन इनका कुञ्ज गलियों में बीत गया
विडियो गेम खेलने का time,गीता सार में रीत गया
और अब इस उम्र में video game खेल रहे है
आते जाते हर किसी पर गीता इश्लोक पेल रहे है

खैर वक़्त ने करवट बदली
हो गयी इनके पापा क़ी बदली……To Be continue !!!

abhi aaage bhi hai bhai ……in next sequel u will find how a brij ka gwala converts to a rajasthani bhaya 😀 …..dekhte rahiye,padhte rahiye…….haan hanse rahiye !!!

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4 thoughts on “चलो आज खुद पर कुछ लिखतें है…..

  1. कान्हा समझते है अपने को,पर गोपियों का अकाल है
    great line… hee hee nice one keep it up…

    🙂

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