चलो प्रिय आज फिर से यूँ ,प्यार के गीत गाते है


मैं लिखता था किताबो में,तुम पढ़ के सुनाती थी
मेरे हर लफ्जों को यूँ ,अपने लब से चुराती थी
धडकते थे दिल जिनसे,वो नगमें गुनगुनाते है
चलो प्रिय आज फिर से यूँ ,प्यार के गीत गाते है

वो मेरे काँधे पर रख सर,तुम यूँ ही सो जाती थी
तेरे जिस्म में,मेरी रूह जाने कहाँ खो जाती थी
ऐसे कुछ मिलन के पल,फिर से संग बिताते है
चलो प्रिय आज फिर से यूँ ,प्यार के गीत गाते है

वो रातो को हाथो में हाथ लिए, चाँद को निहारते थे
छत पर बैठे रात भर,अपने प्यार उसे कितना जलाते थे
आज फिर उसी चाँद को ,अपना मिलन दिखाते है
चलो प्रिय आज फिर से यूँ ,प्यार के गीत गाते है

तेरी आँखों से जो अश्क, मेरी पलकों पर गिरता था
मेरे दिल की तन्हाई को, सिर्फ तेरा दिल समझता था
बहुत वक़्त हुआ,अब फिर से,दिल को दिल से मिलाते है
चलो प्रिय आज फिर से यूँ ,प्यार के गीत गाते है

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7 thoughts on “चलो प्रिय आज फिर से यूँ ,प्यार के गीत गाते है

  1. Yun hi tere naam ke geet gungunate hain,
    Chalo priya aaj fir se yun , payaar ke geet gaatein.

    Jalte the akele tanhai mein, Aaj is tanhayi ko jalate hain,
    Chalo priya aaj fir se yun , payaar ke geet gaatein.

    Its really a nice composition, aapke composition pad kar lagata hai,
    jaise payaar dil mein fir jawaan ho gaya hai, mushkil yahi kai ki, tab usko dil bahut zayaada miss karta hai.

    Its really a sober composition, I really like it.

  2. Though the poem is good, I really do not have the patience to read the
    whole of it! As far as Hindi poems go, I like the inspirational &
    motivational variety, unless it is composed into a melodious song.

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