महबूब नज़र आता है..



प्यार में कहा कभी, किसी को मिली है मंजिले
परवाने का मुक्कदर है, शमा में जल जाने को

आईने में देखू अगर, तो महबूब नज़र आता है
इश्क कहते है शायद,दो जिस्म के मिल जाने को

नजरो से नज़र मिले,तो मचल जाता है दिल
वरना कौन पीता है शराब, सम्हल जाने को

ऐ खुदा, अब ना यूँ मंजिल मुझे मिले कभी
बड़ी मिन्नत से माना है वो, साथ चल जाने को

ये चिलमन की खुमारी है या नजाकत महबूब की
घूँघट में यूँ बेक़रार है आफ़ताब, निकल जाने को

अब के सावन जाने क्या बीतेगी तुम पर शादाब
ढेरो अरमान भरे है सीने में, पिघल जाने को

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3 thoughts on “महबूब नज़र आता है..

  1. ऐ खुदा, अब ना यूँ मंजिल मुझे मिले कभी
    बड़ी मिन्नत से माना है वो, साथ चल जाने को… Bahut khoob… bahut sundar rachna.

  2. once more a master piece …
    may fav lines
    ऐ खुदा, अब ना यूँ मंजिल मुझे मिले कभी
    बड़ी मिन्नत से माना है वो, साथ चल जाने को

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