मैं पन्ना हूँ ..


मैं पन्ना हूँ ….जी जनाब,मैं अन्ना नहीं पन्ना हूँ ! आजकल सारा मीडिया,राजनीति,पब्लिक जहाँ देखो अन्ना में ही लगी है,पर मुझे लोग भूल ही गए है! मैं तो सैकड़ो बरसो से आप लोगो को दुनिया की तस्वीर दिखाता आ रहा हूँ ,अन्ना को तो कुछ महीने ही हुए है ! लेकिन कुछ भी कहो भाई साहब, ये अन्ना है बड़ी कातिल चीज़…इतना बढ़िया image building किया है क़ि ससुरा कोई ऊँगली तो उठा के देखे…..सारी दुनिया के सर पे टोपी पहिना दिए है अन्ना बाबू …और पब्लिक भी ख़ुशी ख़ुशी पहन लिए है ,और ये ही पब्लिक को कोई पार्टी कहती टोपी पहन ने को तो साले पैसे मांग लेते …खैर छोडिये इन पार्टी वालो को,अब तो भाई अन्ना ही अन्ना है सब तरफ …क्या मेला जमाये है बाबू, रामलीला मैदान में ..माँ कसम,मज़ा ही आ गवां ! ओमपुरी से लेकर पानीपुरी तक सब बहुत ही मज़ेदार था भाई ! हम तो रोज़ ही गए रहे…..कभी फ्रेंड के साथ तो कभी गर्लफ्रेंड के साथ….

माँ बिचारी अँधेरे में रोटी बनाती रही पर लाल को मोमबत्ती की नहीं सूझी …पर वही लाल ,बहादुर बनके बड़ी मोमबत्तिया फूंक कर आये इंडिया गेट पर ! बड़ा भारी माहोल था जी,सब लोग खुश थे बस पुलिस वाले बड़े परेशान,जिस डंडे को लेकर वो सबके पिछवाड़े धोते थे आज वही अपने पिछवाड़े पे लगा छुप छुप कर घूम रहे थे…एक बार तो ,अन्ना की टोपी लगा हमारे छोटे अन्ना(अजीज मित्र ) एस.पी. साहब से भिड़ गए …. एस.पी. साहब भी परेशान,क्या करे इनका…हाथ में झंडा,मुह पर तिरंगा,इस नए जेहादी को कैसे रोके? ….अब भाई,तीन देशभक्त,एक मोटर साइकिल …रामलीला मैदान जायेंगे तो जायेंगे …फिर कौन ट्रेफिक और कौन पुलिस ? कोई अपनी बीवी को दिखाने लाया कि देखो आन्दोलन क्या होता है …किसी को अपने कैमरे का प्रयोग ही करना था..किसी को जगह मिल गयी गर्लफ्रेंड घुमाने की…और सबसे ज्यादा भीड़ लगी थी टी.वी. पे आने की ….हम भी काहे झूठ बोले? हम भी वही खड़े हो जाते थे जहां कैमरा घूमता था …फायदा भी हुआ,एक सुंदरी ने पूछ ही डाला माइक आगे करके – आप क्या सोचते है भ्रष्टचार के बारे में ? ,बड़ा कठिन सवाल था ….शायर भी हूँ ,तो कही पढ़ा था कि याद उनको करते है जिन्हें भूल जाया करते हैं…सोचा उसे करते है जो करते नहीं हैं …यहाँ तो डूबे हुए है गर्दन तक भ्रष्टाचार में …ये तो हमारे लिए दार्शनिक सवाल बन गया …जैसे कोई पूछ रहा हो कि “क्या सोचते है जिंदगी के बारे में? ” ….अब टी.वी. पर थे कुछ तो बोलना ही था ..कह दिया कि दुखी है ,परेशा है ,त्रस्त है …पर छुपा गए कि, भहिये हम भी भ्रष्ट है …तब से आज तक ये ही बोल रहे है

वैसे आजकल अन्ना से ज्यादा एक आदमी बड़ा फैमस है …दिग्गी राजा …अंग्रेजी में मात्रा बदल दो तो “डोगी” राजा हो जाता है ….पर आदमी का हो,या कुत्तो का,राजा..राजा ही होता है,बड़े शरीफ आदमी है …आदमी नहीं पूरे आन्दोलन है ! या कहू की पूरा देश है …खबरी ऐसे की ISI फ़ैल …चाले ऐसी की शकुनी फ़ैल …वक्ता ऐसी की वाणी फ़ैल …बेशर्म ऐसे की मनमोहन फ़ैल ! अब जनपथ पर बोर्ड लगा दिया है “Beware of Diggi ” ,ये क्या बोलते है इन्हें नहीं खुद को नहीं पता …बस लगे है …इनकी मालकिन भी आजकल बहुत व्यस्त है …कोई कहता है बीमारी का इलाज़ करके लोटी है ..कोई कहता है की पैसे का इंतजाम करके लौटी है …..एक और थे बड़े खिलाडी.रोज़ टी.वी चेनल पर आकर बडबडाते थे ,जब से अन्ना से पंगा लिया,गायब ही हो गए है …..वैसे कम तो अन्ना भी नहीं है …जवाब लपेट कर देते है …वैसे है अन्ना,हम जैसे,एक दम कोरे ..एक दम साफ़ …पर बाबू अन्ना.लोग तो स्याही फेकेंगे ही ..फेकने दीजिये ..आप तो बस चलते चलिए ..पह्नायिये टोपी ..कम से कम टोपी बनाने वाले तो अमीर हो ही जायेंगे …हम तो हम भी ख्वाब देखने लगे है ,पब्लिक कभी तो कहेगी “मैं पन्ना हूँ”

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