कैसे लिखूं ?


बंद कांच में बैठे
जेठ की दुपहरी
नंगे पाव , सड़क पर चलते उस जिस्म
को देखकर
कोई तो इंसान है
जो चीखता है मेरे भीतर

सोचता हूँ कुछ लिख दूँ

पर
कैसे लिखूं ?
उसकी मुस्कराहट को
जिसे बचपन ने रोना ही सिखाया है
और फिर
हँसते चेहरे पर
कोई भीख भी तो नहीं देता

कैसे लिखूं ?
उसके घर को
जो चौराहे पर
किसी पेड़ के नीचे
शायद आज है
कल नहीं होगा

कैसे लिखूं ?
उस ठंडी बयार को
जो गाडी के शीशे खुलने पर
उसके बदन से टकरा
उसकी आँखों में चमकती है

कैसे लिखूं ?
वो एक या दो रूपये का सुख
जो वो अब सीधे जाकर
अपने बाप को देगी
वो खरीद लेगा
एक बोतल
और कुछ बीडी के बण्डल

अब हम भीख नहीं देते
बुद्दिजीवी हो गए है
देंगे तो ये लोग और बढेंगे
और फिर बहुत सारे और तर्क

फिर क्या करे ?
तड़पने दे बचपन को
वही जेठ की दुपहरी
नंगे पैर
अधनंगे बदन में ……..

Advertisements

2 thoughts on “कैसे लिखूं ?

  1. Such a fab, thought proving poem – Loved it with all my heart (and I mean it). Thanks for sharing it. It had long forgotten to me that Hindi poems are like that.

Your feedback is very important for me ..please leave a comment !!!

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s