कैसे लिखूं ?

बंद कांच में बैठे जेठ की दुपहरी नंगे पाव , सड़क पर चलते उस जिस्म को देखकर कोई तो इंसान है जो चीखता है मेरे भीतर सोचता हूँ कुछ लिख दूँ पर कैसे लिखूं ? उसकी मुस्कराहट को जिसे बचपन ने रोना ही सिखाया है और फिर हँसते चेहरे पर कोई भीख भी तो नहीं […]

दुःख

तुमसे दूर होने का दुःख सच कहूँ तो उदास नहीं होता मैं बस सवाल सा पूछ लेता हूँ कि इन सीली किताबो में गुलाब की पत्तियाँ जो मेरी हर ग़ज़ल पर तुम छुपा गयी क्या इसलिए कि जब तुम न हो तो ये खुशबु आंसुओ का सबब बन इन पन्नो को और नुमाया कर दे

घर में आज दिवाली है ..

. मैं बैठा दूर परदेश में घर में आज दिवाली है मेरा आँगन सूना है माँ की आँखों में लाली है . वो बार बार मुझे बुलाती है फिर अपने दिल को समझाती है मेरी भाग्य की चिंता पर अपने मातृत्व को मनाती है . मैं कितना खुदगर्ज़ हुआ पैसो की खातिर दूर हुआ मेरा […]

माँ …

Today is mother’s day ..I am rarely believes in these ‘day concepts‘ but somewhere we changes even though we don’t want to be,because the people are changing around.Anyways,I have tried to write something on this topic better to say on the strongest relation,on the best creature of GOD.This is the subject which is tough for […]

लगे के तुम हो ….

जब पर्वतो से बादल टकराए तो लगे के तुम हो ठंडी बयार मेरे तन को छू जाये तो लगे के तुम हो सड़के जो बल खाकर इतराए तो लगे के तुम हो और जो तेरी याद मेरे लब पर आ मुस्कुराये तो लगे के तुम हो चाँद बादल में छुप, मुझ को यूँ सताए तो […]

किस पर लिखूँ ??

आज फिर सोच में बैठा,क्या लिखूँ,किस पर लिखूँ कोई एक एहसास तो ऐसा हो,जिस पर लिखूँ महबूब के पावन प्यार पर लिखूँ दर्पण में रचते श्रृंगार पर लिखूँ नमकीन मोहब्बत की बातें लिखूँ या इश्क की मीठी तकरार पर लिखूँ दुनिया की दुनियादारी पर लिखूँ पैसे की बढती खुमारी पर लिखूँ महंगी कारों में बैठे […]

इक तन्हाई भी मिलती है …

दिन भर करता हूँ बातें तुमसे,चेहरे पर हंसी रहती है पर यकीं मान,इक ख़ामोशी मेरे दिल में भी पलती है यूँ तो है हर पल तू मेरे साथ,जागते सोते में मेरे पर इस दिल में आके कभी, इक तन्हाई भी मिलती है तू गर समझे है कि तुझे है दुःख मुझसे ना मिल पाने का […]