इक तन्हाई भी मिलती है …

दिन भर करता हूँ बातें तुमसे,चेहरे पर हंसी रहती है
पर यकीं मान,इक ख़ामोशी मेरे दिल में भी पलती है

यूँ तो है हर पल तू मेरे साथ,जागते सोते में मेरे
पर इस दिल में आके कभी, इक तन्हाई भी मिलती है

तू गर समझे है कि तुझे है दुःख मुझसे ना मिल पाने का कभी
कभी आके देख दिल में मेरे,हिज्र की आग मेरे दिल में भी जलती है

क्यों होती है तू परेशां इतना,क्यों आंसू ही बहाती है
ये प्यार की लगन है पागल ,किस्मत वालो को ही लगती है

ना शौक मुझे सुखन का ‘शादाब’ ,ना लिखने की ही कोई चाहत
दर्द, शब्दों से जब मिलते है तो इक तस्सली सी मिलती है

हमने मंदिर मस्जिद पाले है

मैं रहता हूँ ऐसे वन में
जहा लीर नहीं मनुज के तन में
जहा भूख सर्द रातो में सोती है
जहा किस्मत अपने पर रोती है
जहा दो टूक रोटी के भी लाले है
पर हमने मंदिर मस्जिद पाले है

है रंग का खून का लाल तेरा भी और मेरा भी
होता है तेरी जिंदगी में नित नया एक सवेरा भी
तू भी दिन को जगता है,रातो को सोता है
तेरे दिल में भी मेरे जैसा हृदुय स्पंदन होता है

फिर तू क्यों मुझसे रूठ गया
क्यों मंदिर मस्जिद पर टूट गया
क्यों खून बहाया तूने होली में
क्यों आग लगा दी बहनों की डोली में

क्यों भूल गया,तू पला बढ़ा है इस भारत की झोली में
कैसे प्यार का क़र्ज़ चुकाया,तेरी बन्दूको की गोली ने
तू दुश्मन की बातों में आया,भूल गया उस हंसी ठिठोली को
माँ के सीने में खंजर घोपा,भूल गया उस पावन लोरी को

इस तरह गर तू ,धर्म नाम पर कटता जायेगा
ये देश यूँ ही ,टुकडो में बटता जायेगा
और जब,विश्वपटल पर ये देश ही नहीं रहेगा
तो कहाँ हिन्दू और कहाँ मुस्लमान रहेगा

चलो प्रिय आज फिर से यूँ ,प्यार के गीत गाते है

मैं लिखता था किताबो में,तुम पढ़ के सुनाती थी
मेरे हर लफ्जों को यूँ ,अपने लब से चुराती थी
धडकते थे दिल जिनसे,वो नगमें गुनगुनाते है
चलो प्रिय आज फिर से यूँ ,प्यार के गीत गाते है

वो मेरे काँधे पर रख सर,तुम यूँ ही सो जाती थी
तेरे जिस्म में,मेरी रूह जाने कहाँ खो जाती थी
ऐसे कुछ मिलन के पल,फिर से संग बिताते है
चलो प्रिय आज फिर से यूँ ,प्यार के गीत गाते है

वो रातो को हाथो में हाथ लिए, चाँद को निहारते थे
छत पर बैठे रात भर,अपने प्यार उसे कितना जलाते थे
आज फिर उसी चाँद को ,अपना मिलन दिखाते है
चलो प्रिय आज फिर से यूँ ,प्यार के गीत गाते है

तेरी आँखों से जो अश्क, मेरी पलकों पर गिरता था
मेरे दिल की तन्हाई को, सिर्फ तेरा दिल समझता था
बहुत वक़्त हुआ,अब फिर से,दिल को दिल से मिलाते है
चलो प्रिय आज फिर से यूँ ,प्यार के गीत गाते है

चाँद भी कुछ खफा सा लगता है


मेरी हर रात अब इतनी ही काली हैं
खुद जलता हूँ तो उजाला होता है
तड़पता रहता हूँ इल्जामो में तेरे
बड़ी ही देर से ये सवेरा होता है

ये चाँद भी कुछ खफा सा लगता है
अब करता नहीं है रोशिनी उतनी
भुझा सा है,चमकता भी नहीं है अब
शायद, महबूब इसका भी जुदा सा लगता है

और ये जो तारे है,टिमटिमाते थे रात भर
बीत जाती थी रात उन्हें देख कर
सोचा था की कभी आँचल में भर दूंगा तेरे, इनको
आज बिखर से गए है, रखा था इतना सहेज कर

जानता हूँ,मुझे तड़पाकर,तू भी नहीं सोती होगी
भूलो चाहे कितना भी,पर याद तो आती होगी
आँखें जो मूँद ली है तूने मुझसे
पर सूरत तो मेरी,तेरे दिल में नज़र आती होगी

चलो आज खुद पर कुछ लिखतें है…..

I am in lite mood today …..was thinking abt my past life,I come from a very very conservative and religious family.My grand father was Mehant of famous Dhwarikadhish temple in Mathura.It can give u a thot dat wat restriction I had to enter in dis real world(real???)…….Today I m thinking ….how the change happened,How a brij ka lal converts to natwar lal [:D]….. how spirituality converts into practicality…..how yog converts to bhog:P ……hey chaps,y r u so serious..abey main nahi hua jindagi mein tum kahe 😛 ……chalo ,let me giv it a shot

चलो आज खुद पर कुछ लिखतें है
दुनिया को तो बहुत पढ़ा
कुछ अपने को भी पढ़ते है

तो फिर ले हरि का नाम “संदेशोपरायण” प्रारंभ करते है
गलती से प्रथ्वी पर आई,इस भूल का आरम्भ करते है
बहुत सारे chapter है इसमें
एक चेहरे के multi character है इसमें
इसमें ज्योतिष भी है कवि भी है
अँधेरे को चीरती एक छवि भी है
ये हँसाता भी है,ये रुलाता भी है
कभी कभी ज्ञान की बातें बताता भी है
ये दुनिया घूमता है ,ये फोटो खीचता है
विचारो के हल से,बंजर दिमाग को सींचता है
ये पागल लोगो के लिए dear है
गलती से बना एक इंजिनियर है
इन्हें degree देकर college रोता है
क्या देश में इतना बड़ा फर्जीवाडा भी होता है
खैर छोडिये साहब,अब काहे पोल खोले
बाढ़ आ जाएगी,काहे hole खोले

शुरुआत जन्म से करते है
पिछले जन्म में किये अच्छे कर्म से करते है
पावन धरती मथुरा के पुण्य कुछ ज्यादा थे
देवता इसे स्वर्ग बनाने पर आमादा थे
फिर GOD ने सोचा के चलो कुछ नया present करते है
ऐसे तो public बोर हो जाएगी,इसी को sent करते है
कान्हा और इनके जन्म में सिर्फ एक सड़क का फासला था
ये सड़क के इस पार hospital में अवतरित हुए ,उन्हें देवकी ने उस पार पाला था
ब्रज का होने का इन्हें बहुत बड़ा भोकाल है
कान्हा समझते है अपने को,पर गोपियों का अकाल है
बांसुरी बजाते है ,लोगो को नचाते भी है
खाते खूब है,फिर भांग से पचाते भी है
बचपन इनका कुञ्ज गलियों में बीत गया
विडियो गेम खेलने का time,गीता सार में रीत गया
और अब इस उम्र में video game खेल रहे है
आते जाते हर किसी पर गीता इश्लोक पेल रहे है

खैर वक़्त ने करवट बदली
हो गयी इनके पापा क़ी बदली……To Be continue !!!

abhi aaage bhi hai bhai ……in next sequel u will find how a brij ka gwala converts to a rajasthani bhaya 😀 …..dekhte rahiye,padhte rahiye…….haan hanse rahiye !!!

ये प्यार के अरमां दूर तलक जायेंगे ….

जो तुम कभी ऐसे रूठ जाते हो
दिल से जैसे जान सी लिए जाते हो
दर्द भर जाता है दिल में मेरे
तुम आकर फिर उस पर यूँ मुस्कुराते हो

माना के रूठना,इश्क की ही एक अदा है
बैचेन कर दे महबूब को,वो ये सदा है
पर कभी मुझे कोई इल्ज़ाम तो दे
मैं भी जलूँ विरह में तेरे,वो नाम तो दे

मेरे दिल से तेरी आँखों का रिश्ता इतना गहरा क्यों है
परेशां क्यों दिल ये होता है,जब तू परेशान होती है
न इसे चैन आता है,न वहां वो सोती है
यहाँ ये दिल जलता है,वहां वो क्यों रोती है

रूठने और मनाने में,ये प्यार के पल रूठ जायेंगे
कभी सोचा है पागल,फिर इन्हें कैसे मनाएंगे
मैं जानता हूँ पाक प्यार है तेरा,पर यकीं मुझे पर भी रख इतना
मेरा वादा तुझसे,ये प्यार के अरमां दूर तलक जायेंगे

प्रिय,याद तुम्हारी फिर आई …

तुम प्यारी हो इस जग से ज्यादा
तुमसे प्यारा,सुमुखी प्यार तुम्हारा
इस जन्म की बात नहीं ये सब
ये रिश्ता कुछ सदियों पुराना
बस सोच ये ही,आँख भर आई
प्रिय,याद तुम्हारी फिर आई

याद मुझे है हर वो पल
बीते थे जो साथ तुम्हारे
वक़्त का वो सुनहरा आँचल
जैसे कायनात के सब सुख साथ हमारे
वक़्त ने ली,आज फिर फिर यूँ अंगडाई
प्रिय याद तुम्हारी फिर आई

तेरे बदन की खुशबु यूँ ही
अब तलक मेरे मन में महक रही है
तेरे होठो की नरम छुहन यूँ ही
मेरे तन में यूँ चहक रही है
आज फिर वही हवा,खुशबु तेरी साथ ले आई
प्रिय,याद तुम्हारी फिर आई

याद तुम्हे करता हूँ हर पल
हर पल तुझको ही जीता हूँ
तेरे ख्वाबो में बैठा रहता
तेरे सपनो में ही सोता हूँ
एक नहीं ऐसा वो पल,जब तुझसे हो हुई जुदाई
फिर कैसे कह दूँ प्रिय,याद तुम्हारी फिर आई
फिर कैसे कह दूँ प्रिय,याद तुम्हारी फिर आई…..

Triveni by Gulzar

Triveni…A sangam of river Ganga,Jamuna and saraswati !!! In poetry it is a different art of saying.Urdu sher consists of two lines,better to say two misras.A shayar or poet is able to express his feeling in two lines.But in triveni,poet introduce a third line which gives it a new dimension all together,even though first two lines are well enough to express.Gulzar introduce this new technique of poetry.I wanna share some trivenis from Gulzar sahib and later I will share something from my side.But first something from master.

saawle sahil pe gulmohar ka ped
jaise laila ki maang mein sindoor
dharam badal gaya bechari ka !!

सावले साहिल पे गुलमोहर का पेड़
जैसे लैला की माँग में सिन्दूर
धरम बदल गया बेचारी का …

First two lines are just symbolic,he is comparing the beauty of nature with beauty of his beloved.but when third line comes(Gulzar call it Saraswati),the whole meaning gets change.See,If laila got married then her love wuld have lost his existence.Poet wants to say that Love has its beauty only when lovers are apart.Once they meet love fades its color.So laila is laila till she is unmarried and this is only her religion …

In Pt Sumitranand’s words

मिलन अंत है मधुर प्रेम का,और विरह जीवन है
विरह प्रेम की सास्वत गति है,और शुश्प्ती मिलन है

Triveni has its own taste.If you wanna enjoy its beauty then first read two lines,understand and make a picture that what poet wants to say.After that just read the third one and you will find that whole picture gets changed once you read this. 🙂

The another triveni from gulzar saheb

Udd ke jaate huye pankshi ne bas itna hi dekha
der tak haath hilati rahi wah shaakh fiza mein

alvida kahne ko? ya paas bulane ke liye ?

उड़ के जाते पंक्षी ने बस इतना ही देखा
देर तक हाथ हिलाती रही वह शाख फिजा में

अलविदा कहने को ? या पास बुलाने के लिए ?

first two lines are self explanatory,bt the reason of bird’s flew can be different.May be he want to sit on another branch or bird don’t want to put his weight on this branch further.So when he flew away because of this pressure,branch moved to and fro or if we take first meaning then branch just saying goodbye cos bird is leaving it.But when third lines comes,triveni takes its twist.Bird is not able to figure out that this movement of branch is for saying good bye or it doesnt want to let him go……beauty beauty beauty …….. 🙂

Will update some of his Triveni in future,till you people can share your creation …..ur comments will be highly appreciated …. 😛

Happy New Year

विगत वर्ष देखे मैंने, कुछ सपने कुछ ख्वाब अधूरे
कुछ दिल की पीड़ा देखी,देखे कुछ मुस्कुराते चेहरे
अरमानो के पर भी देखे,मजबूरी के बंधन भी
तम सी गहरी रात भी देखी,देखे कुछ नए सवेरे भी
.
मधु से मधुघट में गिरती मदिरा देखी
साकी के होठो से छूती अधीरा भी देखी
पीने वालो की तडपन देखी,देखी निश्छल छाया
बनके रूपसी ठगने वाली,देखी चंचल माया
.
सूरज का वो तेज भी देखा
चाँद की सुखन शीतलता भी
देखा कल कल गिरता झरनों से जल
फिर नदी बन,बहती निर्मलता भी
.
अनजाने चेहरों के पीछे
जानी पहचानी बातें देखी
फिर कुछ अपनों के मन में
बेगानी होती यादें देखी
.
प्रेयसी का पावन प्यार भी देखा
दर्पण में रच श्रृंगार भी देखा
होठो पे बहती मादकता देखी
नैनो में बसता संसार भी देखा
.
बहुत मिला विगत वर्ष से मुझको
अब आशाओ के कदम नव वर्ष में
रंगों से नहाये ये धरती,जन सब इसके
बीते जीवन,सुखमय अविरत हर्ष में

मुझको ये दर्द भरे जज्बात न दे

मैंने मांगी है होठो पे हंसी तेरी
मुझको अश्को की यूँ सौगात न दे
मेरी ख्वाइश के रहे तू खुश हमेशा
मुझको ये दर्द भरे जज्बात न दे
.
मैं खुश हूँ के गर,तेरी खुशियाँ चेह्के
बनके खुशबु तेरी ये बगिया महके
ख्वाबो में बस जा तू,सदा बनकर
दिल से जाने की यूँ मुझको आहट न दे
.
मैंने की है मोहब्बत सब कुछ भुलाकर तुमसे
सारी कसमें,सारे वादें निभाकर तुमसे
कुछ दूर साथ तो चल,प्यार तो कर
मेरे दर्द-ऐ-दिल को,तेरी ये चाहत न दे ……

प्यार – एक मजबूरी

Hello, How r u ?
I’m fine …..wat abt u ?
me doing great ..so wen u r cuming to India?
ये सवाल पूजा न जाने कब से पूछ रह थी.और हर बार जवाब में दो ही शब्द मिलतें थे – पता नहीं….
शशांक और पूजा दोनों चेटिंग के जरिये ही मिले थे.दोनों एक ही शहर से थे,लेकिन एक दूसरे को जानतें न थे.शशांक एक बड़ी कंपनी में नौकरी करता था और पूजा अभी अपनी एमबीए की पदाई कर रही थी.आजकल की व्यस्त दुनिया में जहा कंप्यूटर ने रिस्तो को जोड़ने का काम भी किया है वही दूसरी और दूरिया भी बढ़ा दी है.लेकिन इन दोनों के लिए तो तकनीक ने जैसे एक दूसरे के दिल को बांध दिया था.पूजा को शशांक का बेसब्री से इन्तजार था.जिस से वो इतना बातें करती थी,केमरे में जिसे देखे बिना उसे नींद नहीं आती थी.उसको छूने का भी तो मन करता है …शशांक विदेश में था लेकिन समय का अंतर दोनों के बीच बढ़ते प्यार में कोई अवरोध नहीं डाल पा रहा था.पूजा और शशांक दोनों रोज घंटो बातें करते,हालाँकि दोनों एक-दो बार ही मिले थे,जब शशांक भारत आया था,लेकिन वो मिलन सदियों के मिलन से भी बड़ा था….एक-दो मुलाकातों में ही उन्होंने साथ जीने मरने की कसमें खा ली थी,प्यार अगर सच्चा हो तो वक़्त मायने नहीं रखता.शशांक की प्यार भरी बातें जैसे पूजा के मन में अजीब सी हलचल मचा जाती थी,पूजा को आजतक किसी ने इतना प्यार नहीं किया.पूजा हर वक़्त,शशांक के ख्यालो में डूबी रहती,उसने अपने भविष्य की कई कहानिया शशांक के चारो और ही बुन रखी थी.पता नहीं क्यों उसे शशांक से इतना प्यार हो गया,और कब हुआ ये भी नहीं पता…अक्सर प्यार में वक़्त गवाही नहीं देता,कोई तिथि नहीं होती जो बताये कब प्यार हुआ,और कोई वजह नहीं होती के क्यों प्यार हुआ.पयर तो एक अविरत बहती बयार है,जो कब शुरू हो कब ख़तम,साथ में क्या लाये और क्या नहीं ,कहना बहुत कठिन है.पूजा शशांक को करीब 1 साल से जानती थी,दोनों एक दूसरे से बहुत दूर रहते थे,लेकिन आभाष तो साथ रहने का ही था,शशांक की आवाज हरदम उसके कानो में गूजती रहती.हर छोटी बड़ी बात में शशांक का जिक्र होता.और इसी तरह दोनों के बीच प्यार बढ़ता गया……वक़्त अपनी गति से गुजर रहा था,वक़्त की स्वयं कोई गति नहीं होती,हालातो के हाथ वक़्त भी मजबूर है,दुखी हालात समय को जाने से रोकते है और सुखी, उसकी गति को बढ़ा देते है….आखिर समय आ ही गया,शशांक को अब भारत आना था,पूजा की ख़ुशी जैसे आसमान छू रही थी.अपने प्रेमी से मिलने की ख़ुशी,उसके मन में हजारो अरमान थे…वो आएगा तो उस से ढेर सारी बातें करुँगी,उसकी बाहों में जैसे सारा जीवन ही निकाल दूंगी,फिर कही घूमने जायेंगे,खूब मौज मस्ती ……जो इतने महीने इस तरह से गुज़रे उनका दुःख तो कुछ ही पलो में भूल जाऊँगी,ऐसे न जाने कितने ख्यालात पूजा के मन में अठखेलिया कर रहे थे…..आज की रात काटना बहुत मुश्किल हो रहा था,इतने सारे विचार,इतनी उत्सुकता,इतना प्यार …शायद पहले कभी नहीं था,

पूजा हाथो में गुलाबो से भरा बुके लिए विसिटर गेलरी में खड़े हुए शशांक का इंतज़ार कर रही थी.पिछली बार मिली थी तो शशांक ने आ के चूम लिया था.सबके सामने ऐसा करने पर पूजा ने बहुत डांटा था शशांक को ,पर इस बार,इस बार तो जैसे……पूजा की पलके शशांक के इंतज़ार को सम्हाल नहीं पा रही थी.फिलाईट को आये हुए 15 मिनट हो चुके थे.शशांक को देख पूजा की आँखें खिल उठी,उसे लगा जैसे संसार के सबसे बड़ी ख़ुशी उसके सामने आ गयी है,उसे शंशंक में ही अपना सब कुछ नज़र आ रहा था,अपना प्यार,अपना जीवन,अपना भगवान,अपनी सारी खुशियाँ……पूजा को देख शशांक ने उसे गले लगा लिया,उसके माथे को चूमा…इतना प्यार जैसे पूजा से सहा नहीं गया,उसकी आँखें छलक आई…. उसके आंसुओ को पोछते हुए शशांक ने कहा – पागल रोती क्यों हो ? आ तो गया हूँ तुम्हारे पास …..अब तुम्हारे पास ही रहूँगा,कही नहीं जाऊंगा

दोनों एरपोर्ट से घर आ चुके थे.पूजा ने आज खाने में काफी कुछ बनाया था ,उसे पता था शशांक को खीर बहुत पसंद है….पूजा ने अपने हाथो से शशांक को खाना खिलाया,जब कुछ भी प्यार से बनाया जाये तो अमृत बनता है,फिर चाहे स्वाद कैसा भी हो,दिल तक जाता है …. ,दोनों ने ढेर सारी बातें की…आज जैसे सारी कायनात पूजा के चारो ओर थी.दिन गुजरने लगे,दोनों का प्यार बढ़ने लगा,दोनों एक साथ रहने लगे थे.अब शायद वक़्त आ गया था कि इस रिश्ते को कोई नाम दिया जाये,दोनों के घरवाले भी इस नाम के लिए राजी थे,कोई अड़चन न थी…….सब कुछ जैसे मन मुताबिक ही चल रहा था,शायद सब कुछ …..पर मन को कौन जाने

शशांक रोज रात को ऑफिस से देर से घर आता,ऑफिस दूर भी था ओर काम भी बहुत ज्यादा था,पूजा अपने कॉलेज से काफी दूर रहने लगी थी ताकि ,शशांक कि नजदीकिया ऑफिस से बढ़ जाये ओर उस से भी….पूजा ने जैसे शशांक के लिए सब कुछ छोड़ दिया था,अपने सारे दोस्त,दोस्तों के साथ बातें,ओर शायद अपनी पढाई भी ….कॉलेज अब एक ओपचारिकता ही थी.रोज शाम को शशांक का इंतज़ार करना,एक साथ खाना बनाना,फिर कुछ देर घूमना ओर फिर सारी रात शशांक कि बाहों में सो जाना.आज पूजा का जन्मदिन था,दोनों ने काफी प्लान बनाये हुए थे इस दिन के लिए,एक अच्छे से होटल में खाना,फिर डिस्को जाकर ढेर सारी मस्ती,शशांक के साथ रह कर पूजा भी आजकल थोडा बहुत पीने लगी थी.शराब और प्यार का नशा कॉकटेल हो जाता है,दोनों के जज्बात जैसे आज अपने पूरे परवान पर थे.जब दो प्रेमी मिल जाये तो लगता है कि संसार में कुछ शेष नहीं है,ये कोई छद्मता नहीं,बल्कि भावो का,विचारो का एकीकरण होता है,दोनों आज एक दूसरे कि बाहों में थे.अथाह प्यार पूजा के इनकार पर हावी था,दोनों कि शादी होने वाली थी इसलिए पूजा को प्यार के इस चरम में भी कोई आपत्ति नहीं थी.ये पल पूजा कि जिंदगी में पहली बार आ रहा था,पूजा इसके लिए तैयार तो न थी लेकिन मना भी नहीं कर पा रही थी,जिसे अपनासब कुछ दे चुकी है,अपना विश्वास,अपने विचार,अपने भाव,अपना मन ,अपना दिल,फिर तन कोई मायने नहीं रखता…..कमरे कि धीमी होती रौशनी,जैसे पूजा के मन में एक सोम्य सा उजाला पैदा कर रही थी,शशांक उसके हर अंग को तरास्ता,अपने लबो से हर अंग की बारीकियों को छूता आगे बढ़ता जा रहा था….आज जैसे भावनाए अपने असिस्तव को साकार रूप दे देना चाह रही थी,हर उस चीज़ को…जो कही न कही शशांक या पूजा के मन में थी,जन्मदिन का ये तोहफा पूजा ने आज शशांक को दे दिया…पूजा को चुमते हुए शशांक उठ बैठा
थोड़ी देर तो बैठो कहा जा रहे हो – पूजा की आँखों में जैसे प्यार तैर रहा था
एक अर्जेंट कॉल है पूजा अमेरिका से,लेना जरुरी है,यही हूँ तुम्हारे पास,कही नहीं जा रहा ..पूजा के बालो में अपनी उंगलिया घुमाते हुए शशांक ने कहा
चलो giv me 30 min,i will come bk …..कहते हुए शशांक ने पूजा के गाल पर चूम लिया,पूजा जैसे शशांक के ख्यालो में डूब गयी,कब आँख लगी पता ही नहीं चला,और ये भी पता नहीं चला की कुछ पाया या कुछ खोया…शायद कुछ चीज़े इंसान अपने दिमाग से नहीं सोच पाता,न ही दिल से …शायद भविष्य ही है जो समझ लेता है और वक़्त आने पर उसे समझाता है

अब ये रोज की बात होने लगी थी,शादी होने के बंधन ने जैसे समाज,परिवार के बन्धनों से मुक्त कर दिया था….

honey,उठो,देखो चाय बन गयी है,पूजा की देर से उठने की आदत कम से कम एक फायदा उसे दिला ही देती थी….बेड टी ….!!! शशांक के सपनो में डूबी आँखें सूरज की किरणों को देखने को तैयार न थी.
शंकु,ये परदे क्यों हटा देते हो सुबह सुबह …..ये ही नाम शशांक के लिए पूजा के मुहं से निकलता था ,पूजा के लिए वो शंकु था और दोस्तों के लिए शेंकी
सुबह ? 10 बज चुके है …मैं बाथरूम में जा रहा हूँ नहाने …जल्दी उठो,कुछ खाने को बना दो बहुत भूख लग रही है,तुम्हे तो पाता है कैसा खाना मिलता है ऑफिस में ….शशांक जल्दबाजी में जातें हुए बोला
पूजा का मन उठने को कतई तैयार नहीं था,तभी शशांक का फोन बज उठा,स्क्रीन पर किसी राहुल का नाम था
sugars,देखो न किसका फोन है – बाथरूम से शशांक की आवाज आई
पूजा ने फोन उठाया,दूसरी और किसी लड़की की आवाज थी – hey shenky,I m waiting for u ……कहा हो जानेमन,पूजा के सामने जैसे अँधेरा सा छा गया,गले में जैसे आवाज ही अटक गयी थी.कुछ समझ नहीं आ रहा था.पूजा ने फोन काट दिया …
किसका फोन था – शशांक ने फिर पूछा
पता नहीं,अपने आप कट गया -पूजा नहीं चाहती थी की शशांक को कुछ पता चले,लेकिन उसका मन …उसका दिल ये मान ने को तैयार न था…पर दिमाग का क्या करे,वो सोचना भी बंद नहीं करता.
आज पूजा कॉलेज भी नहीं गयी,न कुछ खाया…बस एक ही सवाल,कौन थी वो ? अगर दोस्त थी तो नंबर राहुल के नाम से क्यों सेव था ? क्या कोई और भी है शशांक की जिंदगी में ? ऐसे न जाने कितने ही सवाल पूजा को परेशां कर रहे थे.किस से पूछे ? शशांक से ? नहीं उस से क्यों पूछेगी? वो तो गलत ही बताएगा …दोस्तों को तो वो कब का छोड़ चुकी है …..किस को बताये ? पूजा कुछ समझ नहीं पा रही थी,मन नहीं लग रहा था कंप्यूटर के सामने जा बैठी.शायद इस समय ये ही मन को थोडा सहारा दे,….अपने सारे मेल देखने लगी,कितने दिन हुए,सबसे तो नाता सा टूट गया था.लेकिन शायद कोई तो था जो पूजा के सामने सच लाना चाहता था…..गलती से शशांक अपना मेल खुला छोड़ गया था.शायद एक रास्ता भगवन ने पूजा के लिए खोल दिया था ….हर एक मेल को चैक करती,हर एक मेल को पड़ती …..एक एक मेल खुलता जा रहा था और पूजा की आँखों से जैसे बढ़ता पानी सब कुछ बाहे ले जा रहा था,हर एक बाँध को तोड़ता,जैसे आज उसका प्यार पानी बन चुका था और उसके दिल से बाहर आ जाना चाहता था …….नहीं,कोई ऐसे कैसे कर सकता है?इतना धोखा?इतनी बनाबट?इतना फरेब? नहीं ………..एक इंसान नहीं कर सकता,दिल इतना गन्दा नहीं हो सकता,….पूजा की तो जैसे सांस ही उखड गयी थी,कोई तो न था उसके पास,न दोस्त,न घरवाले….किसको बताये? उसने भी तो किसी को बिना बताये ये सब कुछ किया था ……

आज शशांक रोज की तरह फिर देर से आया,पूजा के मन में जैसे हजारो सवाल थे,पर कैसे पूछे,कहा से शुरू करे ……जिस चेहरे में कल तक भगवान था ,आज अचानक,वही इंसान ….उसकी आँखें,उसके दिल से बगावत कर रही थी
शशांक,कौन है ये शिल्पा? – पूजा की आँखों में जैसे सैलाब सा उमड़ रहा था
कौन शिल्पा ? – शशांक ने अनजान बनते हुए कहा
देखो शशांक,सच बताओ…..मुझे बुरा नहीं लगेगा,मैं समझ सकती हूँ ….बता दो …मेरा प्यार कम न होगा – पूजा के दिल में शशांक के लिए प्यार अभी भी बरक़रार था
कोई नहीं है रे, ऑफिस में है एक …दोस्त है मेरी – शशांक ने पूजा को अपनी बाहों में लेते हुए कहा
दोस्त? दोस्त के साथ तुम डिस्को जातें हो,दोस्त को तुम I Love You बोलतें हो,दोस्त के साथ रातें बिताते हो ……पूजा के अन्दर जैसे ज्वालामुखी फूट रहे थे
पूजा अब तुम हद पार कर रही हो,तुम अभी ही वही,गाँव की लड़की की तरह बात करती हो ….रहोगी तो वही न,तुम लोगो को कितना भी पैसा मिल जाये लेकिन औकात ………शशांक भी जैसे अपनी गलती को अपने गुस्से में दबा देना चाहता था
औकात ? जानती हूँ मेरी औकात ….और अब तो वो भी नहीं रही,तुम जैसे दोगले इंसान के साथ रहकर – पूजा को जैसे अपनी गलती को आभाश हो रहा था.

बिना कुछ बोले पूजा अन्दर कमरे में चली गयी,आज खाने में कुछ नहीं बना,धीरे धीरे सारी बातें सामने आने लगी,वो रोज आकर शशांक का कहना की भूख नहीं है ऑफिस में कुछ खा लिया था,वो वीकेंड को भी ऑफिस जाना,रात को ऑफिस कॉल…सब कुछ जैसे पाने मायने बदल रहा था …..हाथ में शराब का गिलास लिए,येही सोच रही थी ,क्या करे,किसको कहे,घरवालो को बताये? उनसे लड़कर ही तो उसने अपनी बात मनवाई थी.दोस्तों को? जिन्हें वो कबका छोड़ बैठी है..और अपनी उस सहेली को जिसने पहले ही बताया था की शशांक का पहले भी किसी के साथ ………….

अभी तक नाराज हो? शशांक ने कमरे का दरवाज़ा खोला और उसके पास आकर बैठ गया
नहीं,कुछ नहीं हुआ ..i m ok – कहते हुए पूजा की नज़रे शराब से भरे गिलास की तरफ गयी,एक ही घूँट में सारा गिलास जैसे जिस्म के अन्दर उतर गया और जैसे शायद सारा दर्द भी
शशांक ने पूजा के गले में अपने बाहों को डालते हुए कहा –i m sorry,पापा का फोन आया था,कह रहे थे शादी के कार्ड छप चुके है
पूजा को जैसे कुछ सुनाई नहीं दे रहा था ,शशांक का स्पर्श जैसे आज उसे चुभ रहा था,जैसे किसी झूठन आज उसके सामने थी ,पर उसे तो अब ये ही सहना था ….इस रास्ते.पर वो इतना चल आई थी,अब पीछे जाना मुश्किल था ..हाँ शायद अब मंजिल कुछ न थी ….पर चलना मजबूरी थी …हाँ, शायद मजबूरी ही

प्यार – एक इम्तिहान

तुम मुझे प्यार नहीं करते,तुम्हे मेरी कोई फिकर नहीं,तुम सिर्फ अपने बारे में सोचते हो,अपने घर वालो के बारें में, मेरे लिए तो तुम्हारे पास वक़्त ही नहीं है – प्रीति की आँखों में अजीब से भाव थे,जो इतनी उदासी,इतनी निराशा,इतना बेगानापन.ऐसा अजय ने आखिर क्या किया था ?वो तो सिर्फ चाहता था की अमेरिका जाकर कुछ पैसे कमा ले और फिर बापस आकर पूरी जिंदगी प्यार से बिताये और फिर 6 महीने की ही तो बात थी,इतना समय तो बस पलो में बीत जाता .अजय कभी हाथ में पकडे हुए ऑफर लैटर की तरफ देखता कभी प्रीति की उदास आँखों में.आखिर पैसा भी तो जिन्दगी के लिए जरुरी है.पैसे से इस दुनिया में सब कुछ पाया जा सकता है .और फिर इस तंगहाल जिंदगी को वो कब तक जियेगा.उसे हर चीज़ के लिए सोचना पड़ता है,वही घर से निकल कर लोकल बस का सफ़र,फिर २ किलोमीटर पैदल चलना.हर जगह पैसे की कमी खलती है.अछ्छे होटल में जाने से पहले 10 बार सोचना पड़ता है.वीकेंड आते ही जैसे खामोसी सी छा जाती है.घर पैसे भिझ्वाने के बाद कुछ भी तो नहीं बचता,और घर भिझ्बाना भी तो जरुरी है ,छोटी बहन कि शादी भी है,घर भी बन रहा है,पापा रिटायर हो चुके है …..आखिर उसकी जिंदगी अकेले की ही तो नहीं है. अजय और प्रीति दोनों अलग कोम्पनिएस में कम करते थे.दोनों साथ रहते थे,हालाँकि दोनों की शादी नहीं हुयी थी लेकिन प्यार इतना गहरा था कि एक दुसरे के साथ रहना अब बस मुश्किल सा था.बड़े सहर कि अनदेखी ऐसे रिस्तो को स्वीकार कर लेती है .रोज दोनों एक ही साथ घर से निकलते,एक खाना खाते,एक साथ घुमते,दोनों एक दुसरे का ख्याल रखते,तंगहाल नहीं थी जिंदगी पर फिर भी,मनुष्य कि आगे बदने कि प्रवर्ती उसे हमेशा से कुछ श्रेष्ठ करने के लिए उकसाती रही है.बेहतर जिंदगी कि चाहत इंसान कि सबसे बड़ी शक्ति भी है और सबसे बड़ी कमजोरी भी.
नहीं प्रीति ऐसा नहीं है…जरा सोचो,इतनी बड़ी कंपनी है,कुछ वक़्त उसमें कम करूँगा तो अच्छा अनुभव हो जायेगा,फिर विदेश जाकर कुछ पैसे भी तो बचा लूँगा और हो सका तो तुम्हे भी वह बुला लूँगा और नहीं भी हो पाया तो आ तो रहा ही हूँ ना 6 महीने में.दुबारा बापस आकर एक ख़ुशी जिंदगी शुरू करेंगे .एक फ्लैट ले लेंगे कब तक इस किराये कि माकन में यु ही गुजर करेंगे.हमारे पास सब कुछ होगा.एक फ्लैट,कार,अच्छी नौकरी,और ढेर सारा प्यार – अजय ने प्रीति को समझाते हुए कहा
देखो तुमने पिछली बार भी नहीं जाने दिया था,तुम्हे पता है जो बंदा मेरी जगह गया था आते ही घर ले लिया है.तुम मुझे ना रोकती तो हम भी आज अपने घर में रह रहे होते. आपनी कार होती.कार में मेहँदी हसन कि गजले और तुम्हारे हाथ को अपने एक साथ से पकडे कार चलाता मैं – कहते हुए अजय ने प्रीति के गले में अपनी बाहे डाल दी
छोडो भी,तुम ना अपनी बातो से मुझे मना नहीं सकते – प्रीति कि आँखों में ढेर सारा प्यार छलक आया प्रीति के लिए ,पर वो किसी भी कीमत पर अजय को दूर नहीं जाने देना चाहती थी,प्यार का दूर जाने का एहसास बहुत कठिन है ….वही समझे जिसने ये सहा है
प्रीति सोचो,इतना पैसा,इतनी खुशिया ..सोचो तो ज़रा – अजय को लगा प्रीति मन जाएगी
पैसा? क्या पैसा ही सब कुछ है – प्रीति के चेहरे पर आक्रोश था
पैसा सब कुछ नहीं,पर बहुत कुछ है – अजय ने समझाते हुए कहा
जानती हूँ,पर तुमसे दूर नहीं रह पाऊँगी, मर जाउंगी – कहते हुए प्रीति ने अपना सर अजय के कंधो पर रख दिया
कब जाना है ? प्रीति ने अपने आप को सम्हालते हुए कहा
कल,कल सुबह ही जाना पड़ेगा …..२ दिन बाद तो ज्वाइन करना है – अजय ने प्रीति के माथे को चूम लिया
दोनों ने एक साथ रोज कि तरह खाना बनाया,फिर थोड़ी देर शेर के लिए निकल गए.महानगरो कि सुबह, शाम,रत सब  एक जैसी ही होती है.भीड़ भरी सड़के,सुने सुने दिल,सामानों से लदी दुकाने पर खली होते एहसास…अज पूर्णिमा कि रात थी,चाँद आज पूरे शबाब पर था.पर नियति है के प्रकर्ति कि सारी चीज़े क्रमित होती जाती है  ,चाँद को भी कल से ढलना था….हरिवंश राय बच्चन कि कविता कि कुछ पंक्तिया है ” खोने का दुःख छुपा है,पाने के सुख के पीछे” ..कल से चाँद भी घटता जायेगा ,प्रीति के मन में भी यही भय था ,कही दूर जाकर अजय का प्यार कम ना हो जाये,आसक्ति,लगाव इंसान के सबसे बड़े शत्रु भी है और सुख के सबसे बड़े कारण भी,बढ़ता प्यार दुःख को भी बढाता है,प्रीति कि आँखें नाम थी,दोनों बोना बोले चले जा रहे थे …कुछ कदम आगे ही घर था
बिना कुछ बोले दोनों घर लौट आये
प्रीति कल सुबह जल्दी जाना है और फिर कुछ त्यारिया भी करनी है,ऐसा करो,तुम सो जाओ
बहुत बार शब्द अपने भावार्थ खो जाते है,अजय कि बात में प्रीति कि प्रति प्यार था,पर प्रीति ने उसे अपने ही ढंग से लिया,गलत वो भी ना थी.पर इस बात को आगे बढ़ाना नहीं चाहती थी इसलिए दिवार कि तरफ मुह करके लेट गयी.कहते है सच्चे प्यार में भगवान होते है,अजर प्रीति के मन कि बात भाप गया था.हाथ में पकडे बैग को जमीन पर रखकर वो प्रीति के पास जाकर बैठ गया और अपना हाथ प्रीति के सर पर रख दिया.कान में जाकर धीरे से कहा – पागल तू ही तो मेरी हिम्मत है ,तू ही ऐसे करेगी तो …..कहते हुए अजय ने प्रीति को चूम लिया.प्रीति कि उम्र कोई 22-23 साल थी.जवानी में बढती उम्र के साथ एहसास भी बढ़ते जाते है.दोनों १ साल से साथ रह रहे थे पर कुछ चीज़े अभी भी दूरिया बनाये हुए थी.पर आज जैसे बढ़ने वाली दूरी,नजदीकिया ला रही थी
तुम नहीं जानते,तुमसे कितना प्यार करती हूँ ….एक पल नहीं जी पति तुम्हारे बिना और 6 महीने – कहते हुए प्रीति कि आँखों में आंसू छलक आये
अरे मेरी प्रीति इतनी कमज़ोर? प्रीति के आंसू पोछते हुए अजय ने कहा
प्रीति और अजय आज तक इतने करीब नहीं आये थे ,हालाँकि दोनों एक दुसरे को 2 साल से जानते थे और करीब १ साल से एक साथ रह रहे थे.प्रीति कि सांसे अजय के चेहरे से टकरा रही थी.उसके सुर्ख होठो पर आंसू कि बूनसे ऐसे लग रही थी मनो सर्दी कि सुबह में गुलाब कि पंखुदियो पर उस कि बूंदे जमी हो …अजय ने अपने होठो से उन बूंदों को सोख लिया,ऐसा पहली बार नहीं हुआ था लेकिन आज कुछ अलग एहसास थे.दुःख और सुख एक साथ हो तो इंसान कुछ समझ नहीं पाता.पूरा चाँद,सर्दी कि रात,दो प्रेमी और असीमित प्यार,जैसे सारी कायनात उनके चारो और अपनी खुशिया लुटा रही थी ,दोनों आज एक दुसरे को अपना सर्वश दे देना चाहते थे,जब मन मिल जाये,विचार मिल जाये तो तन मायने नहीं रखता.दोनों एक दुसरे में समां जाना चाहते थे
आज तन भी मिल चुका था ..कुछ भी शेष नहीं बचा था,कुछ भी नहीं ,कुछ भी नहीं अजय के माथे पर पसीने कि बूंदे जैसे उसके बिछुड़ने के दर्द को धो रही थी
इतने दूर जा रहे हो,मुझसे दूर मत चले जाना -प्रीति कि बातो में मासूमियत थी अजय ने प्रीति को चूम लिया,जाने कहा देती हो ? मेरे दिल को तो पकड़ कर रख लिया है तुमने – अजय ने हँसते हुए कहा,रात का अँधेरा बढ़ता जा रहा था,प्रीति के लिए जैसे समय भागता जा रहा था.वो समय को रोकना चाहती थी .चाहती थी कि सुबह आये ही ना,अजय सो चुका था पर प्रीति कि नज़रे अभी भी अजय के चेहरे से टकरा रही थी.जाने कब आँख लग गयी पाता ही ना चला
उठो प्रीति,६ बज गए है,चलो चाय पी लो – अजय ने चाय का कप प्रीति के पास रखतें हुए बोला
तुम तैयार भी हो गए,मेरी तो आँख ही नहीं खुली – प्रीति ने चेहरे से रात को आये ख्यालो को हठाते हुए कहा
चलो चलो ,अब उठ भी जाओ,मुझे थोड़ी देर में निकलना है – अजय प्रीति को दुबारा उन ख्यालो में नहीं जाने देना चाहता था
प्रीति उठी,तैयार हुयी,अजय के लिए नास्ता बनाया,
मैं भी चलूंगी तुम्हे छोड़ने- प्रीति अजय के साथ एक एक पल को जी लेना चाहती थी
नहीं रे,मुझे यहाँ से ऑफिस जाना है,वह कुछ काम है और फिर ऑफिस कि गाड़ी से ही एअरपोर्ट निकल जाऊंगा ,वैसे ही इतना दूर है एयरपोर्ट ,तुम रहने दो – अजय प्रीति को उस बिछडाव के दर्द से बचाना चाहता था
अजय,पता नहीं क्यों मुझे ऐसा लग रहा है जैसे तुम मुझसे बहुत दूर जा रहे हो – कहते हुए प्रीति कि आँखों में आंसू छलक आये
अरे पागल,ऐसा नहीं है,तेरे पास ही तो हूँ ,तेरे अंदर – अजय ने प्रीति के सर को चूम लिया
चलो चलो ,अब में चलता हूँ ,तुम अपना ख्याल रखना और कोई भी बात हो मुझे बता देना,मैं रोज फोन करूँगा तुम्हे -कहते हुए अजय ने अपना सामान उठाया और चलने लगा
अजय,एक मिनट रुको… I love you ..कहते हुए प्रीति अजय के गले से लिपट गयी,जैसे उसे जाने नहीं देना चाहती थी,इस बार अजय भी आंसू नहीं रोक पाया,दोनों एक दुसरे कि बाहों में रोते रहे.
चलो अब मैं चलता हूँ ,कहते हुए अजय ने दरवाजा खोला.प्रीति भी पीछे पीछे दरवाजे तक आ पहुंची.अजय ने पीछे मुड़कर नहीं देखा शायद प्रीति कि भीगी आँखों को नहीं देख सकता था.बल्कि प्रीति का मन कह रहा था कि एक बार तो उसे देखे …धीरे धीरे अजय,प्रीति कि आँखों से ओझल होता जा रहा था और किसे पाता था कि उसकी जिंदगी से भी
अजय न्युयोर्क पहुँच चुका था,2 सप्ताह भी बीत चुके थे.रोज रात प्रीति से फोन पर बात होती थी.प्रीति अकेली हो चुकी थी,इतने बड़े शहर में कोई उसका अपना ना था,पर अजय कि यादें उसे सहारा देती थी और शायद जिंदगी जीने का एक मकसद भी.बढ़ता काम का भोझ अजय के समय को काम कर रहा था,अब बातें काम होती थी पर प्यार उतना ही था और शायद बढ़ भी गया था.अजय कि आँखों में सुनहरे भविष्य के सपने थे ,अपना घर,अपनी गाड़ी,अच्छी नौकरी और ढेर सारा प्यार …और क्या चाहिए था उसे .अजय बहुत मेहनत करने लगा था,ऑफिस से काफी प्रोह्त्सान मिल रहा था.सब कुछ अच्छा चल रहा था,समय जैसे अपनी रफ़्तार पकड़ चुका  था.सब कुछ अच्छा चल रहा था,बस फर्क आ रहा था बस प्रीति कि बातो में.जिन बातो में प्यार होता था,उनमें अब सिर्फ कुछ घर कि बातें,कुछ नौकरी कि और कुछ इस दुनिया की बातें ही रह गयी थी.जो दुनिया दोनों ने अपने लिए बनायीं थी जैसे धीरे धीरे खत्म सी होती जा रही थी.अपनी मसरूफियत में वो प्रीति के बदलते स्वाभाव को समझ नहीं पा रहा था.काम होती बातें दूरिया बढाती जा रही थी.एक दिन प्रीति का फोन नहीं आया.जब अक्सर अजय ऑफिस से बापस आता तो प्रीति से बातें करता था.आज २ साल में पहली बार हुआ था कि अजय ने प्रीति से बात नहीं की.आज अजय ने कुछ खाने को भी नहीं बनाया था,बस बिस्तर पर लेते लेते सोच  रहा था.कही कुछ हो तो नहीं गया उसे,इतने बड़े शहर में अकेली रहती है,कही कुछ हो गया तो अपने आप को माफ़ नहीं कर पायेगा,कही उसका मोबाइल तो चोरी नहीं हो गया,कही अपने घर तो नहीं चली गयी,पर उसे बिना बताये तो नहीं जाएगी ..जाने ऐसे कितने ख़यालात उसके दिमाग में आ रहे थे रात कब गुज़र गयी उसे पता ही नहीं चला
अजय की मसरूफियत,प्रीति को अजय की बेबफाई लग रही थी.इंसान अपने मन को नहीं समझा पता और दूसरे के मन को समझाना …..प्रीति ने अब अजय की ही कम्पनी ज्वाइन कर ली थी,अजय ही ने ये सब करवाया था,ताकि जब बापस आये तो दोनों एक साथ ऑफिस जा सके,एक साथ ही काम करे और ऐसे कितना वक़्त मिल जायेगा एक दूसरे के साथ रहने का आज फिर प्रीति का फोन नहीं आया,और ना ही उसने अजय का फोन उठाया,अजय आज कल से ज्यादा परेशान था.प्रीति का कोई दोस्त भी नहीं था जिस से पूछ ले की वो कहा है,क्या हुआ है ,आज की रात भी बिना कुछ खाए निकल रही थी….अजय ने अपनी कम्पनी के दोस्त से बात की,पता चला की प्रीति रोज ऑफिस आ रही है,फिर ऐसा क्या हुआ है,कही उसने कुछ गलत तो नहीं बोल दिया ….सब कुछ ठीक तो है ?
सब कुछ ठीक नहीं था,कुछ बहुत ज्यादा और जल्दी बदल रहा था प्रीति से बात किये बिना अजय नहीं रह पा रहा था.ना तो काम में मन लग रहा था ना खाने पीने का ही होश था.10 दिन में वो शारीर से आधा हो चुका था. नहीं,बस अब और नहीं …मैं अब यहाँ नहीं रह सकता,उस पैसे का क्या करूँगा जब प्रीति ही साथ नहीं होगी.उसे तो पता ही नहीं की प्रीति को क्या हुआ है,कही उसके घरवालो ने कही ………..नहीं,ये तो नहीं हुआ होगा ,अजय के मन में जैसे विचारो के तूफान आ रहे थे.अगले दिन अजय ने ऑफिस जाकर इस्तीफा दे दिया,किसी से कुछ नहीं बोला,सामान बंधा और अगली ही उडान से अपने देश लौट चला,प्यार में बहुत शक्ति होती है,जब वो दिल में होता है तो सब कुछ आसान  हो जाता है

२ दिन का सफ़र,प्रीति की चिंता,गिरती सेहत…जैसे अजय की परीक्षा ले रही थी. आदमी का असली इम्तिहान दुःख के समय में होता है,अजय काफी हिम्मत वाला बंदा था,पर दिल कमज़ोर हो जाये तो हिम्मत भी जवाब दे देती है .अजय भारत पहुँच चुका था.दिल में हजारो सवाल लिए ऑटो में बैठ घर की तरफ बढे जा रहा था.आज रविवार है प्रीति घर पर ही होगी,देखतें ही गले लगा लेगी,कितना रोएगी.कितना दतेगी,कितना प्यार करेगी …अजय की आँखें तरस गयी थी प्रीति को देखे हुए.आखिर अजय घर पहुंचा.घर पर ताला लगा था.२ दिन का थका वह घर के नीचे ही बैठ गया,जनता था प्रीति का कोई और दोस्त तो है नहीं .कही आसपास ही गयी होगी आ जाएगी थोड़ी देर में …..पास की दुकान पर ही चाय पी और एक सिगरेट भी जला ली जिसे वो शायद उसने २ साल पहले छोड़ दी थी,प्रीति ने अपनी कसम दी थी ..पर आज ना जाने क्यों वह अपने आप को रोक नहीं पाया,शायद कोई ईश्वरीय शक्ति थी जो उसे ऐसा करवा गयी थी
इन्तजार को ४ घंटे हो चुके थे ,शाम ढलने लगी थी,अँधेरा बढ़ रहा था ,तभी अचानक एक कार आकर रुकी,इस कार को तो अजय जानता था,उसके दोस्त राहुल की ही तो थी.तभी कार का गेट खुला,एक लड़की उतरी,अँधेरा बहुत था अजय ढंग से नहीं देख पा रहा था.पर शायद वो प्रीति ही थी ..हाँ प्रीति ही तो थी,तभी राहुल कार से उतरा और प्रीति को चूम लिया …….अजय के लिए जैसे दुनिया ही खत्म हो चुकी थी.लेकिन अपने आप को सम्हालते हुए वो आगे बढ़ा जैसे शायद वो अपनी आँखों को धोका देना चाहता था,नहीं प्रीति ऐसा नहीं कर सकती थी ….वो तो इतना प्यार करती थी उस से ….हाथ में सिगरेट सुलग रही थी और तन में दिल ……प्रीति ने अजय की तरफ देखा और फिर जलती सिगरेट को ,जैसे कोई उसकी चिता सुलगा रहा हो …….दोनों एक दूसरे से कुछ ना बोले,बोलतें भी क्या ……
अजय ने अपना बैग उठाया और चलने लगा उस राह पर,जो जिंदगी उसे दिखा रही थी ….मन में अपने अधजले प्यार को लिए,शायद अब किसी पर विश्वास नहीं कर पायेगा,अपने पर भी नहीं …..

प्यार – एक निरंतरता

कितनी चम्मच शक्कर डालू चाय में ? उसने गीले बालो को अंगुलियों से कान के पीछे करते हुए कहा
बस एक बार अपने होठो से छू लो,शक्कर की क्या जरुरत है ? मैंने हँसते हुए बोला
तुम ना,बिलकुल नहीं बदले हो ….वही हो 15 साल पहले वाले हाई स्कूल लवर …..कुछ तो नया सीख लेते – सामने वाली कुर्सी पर बैठते हुए वो बोली
सच में कुछ नहीं बदला,सब कुछ वैसा ही है 15 बरस पहले वाला,वही वादियाँ,वही पहाड़,वही जगह,वही सुबह,वही सर्दी की सुनहरी धूप,वही प्यार,वही एहसास,वही आँखें,वही मुस्कान…..कुछ नहीं बदला,कुछ भी तो नहीं I
शायद जो चीज़े शुद्द होती है,समय के साथ नहीं बदलती,तभी न जाने कितनी इमारते आज भी वैसे के वैसे खड़ी हुई हैं कितने मौसम आये और चले गए लेकिन वो आज भी समय को दोखा दे रही है …सोचते हुए मैं अपने ही ख्यालो में खो गया
हे सोना ! क्या हुआ ? किसकी यादो में खो गए हनी …कौन है ? उसने शरारती स्वर में कहा
कुछ नहीं रे,ताजमहल के बारे में सोच रहा था
ताजमहल? मैं सामने हूँ और तुम्हे ताजमहल याद आ रहा है ? वो हँसते हुए बोली
नहीं जाना, जरा सोचो …ताजमहल अभी तक वैसा ही है जैसा सदियों पहले था,वही चमक,वही रोनक,उसके समकालिक कितनी इमारते धूमिल हो चुकी है,कुछ तो कारण होगा ? मेरी आँखों में एक सवाल था,हालाँकि जवाब मुझे पता था ऐसा आज से नहीं 15 सालो से हो रहा था जिन सवालो के जवाब मुझे पता थे,फिर भी उस से पूछता था और ये भी जनता था की वो क्या बोलेगी,शायद सिलिये की सवाल तो सो शरीरो के बीच में थे,पर आत्माए तो सब जानती थी
अरे इसमें क्या है ? जो ईमारत प्यार की बुनियाद पर,विश्वास की ईटो और एहसास के गारो से बनती है अमर हो जाती है – उसकी आँखों में अजीब सी ख़ुशी थी,जैसे कोई बच्चा किसी कठिन से प्रश्न का हल करने के बाद खुश हो जाता है ,कठिन से कठिन बातो को सरल शब्दों में कह जाने की कला शायद भगवान ने उसे देकर भेजी थी,मैं अक्सर कहता था – तुम तो भगवान की बेटी हो
आर्यन तुम और तुम्हारी ये फिलोशफी कभी बंद भी करोगे ? इस बार उसकी आँखों में कुछ शिकायत सी थी उसने अपने हाथ को मेरे हाथ पर रख दिया,जैसे उसे अब इसका जवाब नहीं चाहिए था उसका स्पर्श आज भी उतना ही नया था जो आज से बरसो पहले था उसकी छुहन दिल तक जाती थी जिस्म में एक मीठी सी लहर हिलोरे लेना शुरू कर देती थी
चलो चलो ,छोडो ये सब
आज का क्या प्लान है,ये तो बताओ – मैंने बात बदलते हुए कहा
प्लान तो है तुम्हारी बाँहों में बैठकर पूरा दिन बिताने का,पर सोचती हूँ पहले जाके उस कान्हा से मिल आऊं जिसने तुम्हे मुझसे मिलाया , कहते हुए उसकी आँखों में समर्पण और भक्ति भाव झलक आया
ओह मंदिर!! मंदिर जाने की सोच रही हो जाना ? बाप रे …..its too cold.नहीं मुझे नहीं जाना इतनी दूर …..तुम तो जानती हो तुम्हारे पास आकर कही जाने का मन नहीं करता – अपने आलसीपन को चाहत से ढकने की कोसिस करते हुए मैंने कहा
चलो उठो भी,बहुत हुए ये फिल्मे डायलोग,सच में तुमसे बड़ा spiritual नास्तिक मैंने दुनिया में नहीं देखा …उसके शब्दों में प्यार भी था और थोड़ी नाराजगी भी …उसकी ये अदा मुझे हमेशा से अच्छी लगती थी,उसके बहुत सारे शब्द जो सिर्फ मेरे लिए ही इजाद हुए थे जैसे spritual horny,passive agressive,virgin सन्यासी …….और भी ना जाने क्या क्या ?
मंदिर जाने की इक्छा मेरे घोर आलसीपन पर हमेशा से भारी पड़ी है वैसे कान्हा से मेरा रिश्ता बहुत पुराना है या ये कहू के दोस्ती सी है ….उनका जनम हुआ सड़क के उस पार जेल में और मेरे सड़क के इस पार हॉस्पिटल में ….मेरी ये सोच. मुझे भगवान् ले और करीब ले आती है I भगवान के प्रति लोगो का विश्वास. भय है या भक्ति कहना बेहद कठिन हैI इस दुनिया में ऐसे बहुत कम लोग है, जो मंदिर भगवान् को उन चीजों के लिए, जो उन्हें बिना मांगे मिला,के लिए धन्यवाद देने जातें हो,वरना तो सारे मंदिर अटे पड़े है मागने वालो से ,किसी को नौकरी चाहिए,किसी को बेटा,किसी को धन ,किसी को कुछ ,किसी को कुछ ….और फिर शुरू होती है सोदेबाज़ी……ये दोगे तो ये करूँगा,वो दोगे तो वो करूँगा…वाह रे मनुज,वाह रे तेरी भक्ति …
अरे अरे सोना,हुआ क्या है तुम्हे?कितना हसीन मौसम है,कब से इन्तजार थे इस पल का ओ…चलो अब उठ भी जाओ,कब तक यहाँ यूँ ही बैठे रहोगे? हाथ पकड़कर वो उठाते हुए बोली
चलता हूँ ना,अब जाना है तो नहाना भी तो पड़ेगा
मैं उठा और थके कदमो से कमरे की ओर चलने लगा,दिसम्बर का महिना,इतनी सर्दी ओर नहाना ….सच में भक्ति आसान नहीं,लेकिन अब क्या ? उसकी किसी बात से इनकार करूँ ये भी तो मुमकिन नहीं.कमरे में लताजी का गाना बज रहा था …मोरा गोरा अंग लई ले, मोहे श्याम रंग दई दे …!!!
सुबह के १० बज चुके थे,पहाड़ो की बर्फ,धरती की धुंध के साथ मिलकर सूरज की गर्मी से लड़ने की कोशिश कर रही थी ओर शायद जीत भी रही थी.कमरे की खिड़की से झांकती हुयी बर्फ दिल को भा रही थी .असल में हमें चीजों का एहसास तब होता है जब या तो वो हमारे पास होती नहीं है या फिर बहुत कम होती है.लेकिन प्यार एक ऐसी चीज़ है जो जितनी ज्यादा हो उतनी ही कम हो जाती है,शायद इसलिए की प्यार की कोई परिभाषा नहीं होती बरसो की मोहब्बत के बाद भी कहना मुश्किल है की प्यार क्या होता है, बड़े स्वार्थी है वो लोग जो प्यार को परिभाषित करते है
वो कमरे के कोने में रखे ड्रेसिंग टेबल के सामने खड़ी थी,उसके खुले भीगे बाल आज भी आकर्षित कर रहे थे .
क्या कर रही हो? मैंने धीरे से पीछे जाकर उसे अपनी बाहों में भर लिया
तुम्हे पता है? वो इससे आगे कुछ बोल पाती मैंने कहा – हाँ,सब पता है ? कहना जरुरी है?
ऐसे कैसे होता है? तुब सब बिना कहे कैसे जानk लेते हो ? काला जादू जानते हो ना – वो हँसते हुए बोली
नहीं रे,तेरे अंदर ही तो हूँ मैं-कहते हुए मैंने अपने होठो से उसकी गर्दन को छू लिया,वही सवेंदना,वही एहसास,वही गर्माहट,वही सांसे,वही मदहोशी….कुछ भी तो नहीं बदला
छोडो भी,ये वक़्त है रोमांटिक होने का,पलटकर अपने दोनों हाथो को उसने मेरे गले में डाल दिया
आज भी इतना प्यार करते हो ? क्यों करते हो ? बोलो बोलो -उसने हँसते हुए कहा.शब्द मुहं से तो निकले थे पर उनका कोई सार्थक मतलब नहीं था.कुछ सवाल ऐसे होते है जिनका वास्तव में कोई जवाब नहीं होता,शायद वो सवाल नहीं होते,बस कहे सवाल के रूप में जाते है …जैसे कोई कहे “I love you”
पहले भी कहा था,आज भी वही जवाब है ….नहीं पता,बस हो गया.अब तुम इसे true love कहो, plutonic कहो, mystiq कहो ,मेरे लिए तो प्यार है बस प्यार-कहते हुए मैं पास में रखे सोफे पर जाकर बैठ गया
सोना,वक़्त देखा है? – मंदिर जाने की बेकरारी उसे मुझसे दूर खीच रही थी
हाँ, वक़्त देखा,जमाना देखा,दोस्त देखे,रिश्ते देखे…पर तेरे प्यार से खूबसूरत कुछ नहीं है,कुछ भी नहीं
मेरी बात सुनकर वो मेरी गोद में आकर बैठ गयी,उसके गिले बाल मेरे गालो से टकरा रहे थे,कुछ ऐसा एहसास था जैसे बर्फीली हवाए शरीर से टकरा कर मीठी सी लहर जिस्म में गहरे तक छोड़ जाती है
कितना प्यार करती हो मुझसे?बताओ ? – मैंने मस्ती भरे स्वर में पूछा
उसने जवाब होठो से दिया,उसके नर्म सुर्ख होठ मेरी आत्मा से बात करने लगे.किसी ने सच ही कहा है दो आत्माए होठो से ही बात करती है, जब दो लब एक हो जाये, दो सांसे एक साथ बहने लगे, दो दिल एक साथ धडकने लगे,तो दो आत्माओ का मिलन होता है,आज भी उतनी ही बेकरारी,उतने ही बेचैन एहसास,उतना ही प्यार,उतनी ही तपन…सब कुछ पहले जैसा ही नया था.मेरे हाथ जैसे उसके हर अंग को नाप लेना चाहते थे.चाँद निखरता जा रहा था,चांदनी हर तरफ फैलने लगी थी,उसने आँखें मूँद ली थी,बेचैन कुमोदनी जैसे चाँद को देख मचल उठती है चाँद में समां जाने को,गर्म साँसेमेरे अंतर्मन को छूने लगी थी,लहरें उठने लगी थी,ज्वार आज उचाईयां छू लेना चाहता था ,शायद कोशिश में अपने चाँद तक पहुचने की…….बहाब किनारे की तरफ बढ़ रहा था,सारी बाधाओ को तोड़ता हुआ,सब कुछ अपने में समेटता हुआ…सारे जज्बातों को,सारे अहसासों,सारी दूरियों को,सारे प्यार को ….सब कुछ समाता जा रहा था …सब कुछ,सब कुछ,सब कुछ
I love you कहते हुए उसने आँखें खोली…उसकी आँखे प्यार से भरी थी
I know it, कुछ नया बोलो – मैंने मुस्कुराते हुए बोला
कुछ नहीं कह सकती, तुम सब तो जानतें हो ….दोनों एक दूसरे की बाहों में बहुत देर तक लेटे रहे.एक दूसरे की आँखों में आँखे डाले….जैसे दो आत्माएं शारीर बदल चुकी थी,एक नयी सी चेतना नज़र आने लगी थी उसकी आँखों में,साथ में ढेर सारा प्यार,मुझ पर खुद से ज्यादा विश्वाश …होता भी क्यों नहीं,मेरी आत्मा जो थी उसके शारीर में ……

नज़रे …


कहते है नज़रे बयां करती है
हाल-ऐ-दिल का फ़साना
खुश हो दिल तो
गाती है जिंदगी का तराना
और दुखी हो मन तो
बहा देती है, दर्द बेगाना

पर उसकी आँखों में
एक अजीब सी ख़ामोशी है
थोडा सा दर्द है, थोड़ी ख़ुशी
थोड़ी सी मदहोशी है
जिंदगी के कुछ कडवे पल है
कुछ बिखरे सपने है
कुछ अधूरी ख्वाहिशे
और कही जैसे जगी सी बेहोशी है

वो जब नज़रे मिलाती है
दिल में गहरे से उतर जाती है
और फिर जैसे बना लेती है नाता
मेरे दिल से, मेरे मन से
मेरी आत्मा से, मेरे तन से

कही ये नज़रे ही तो नहीं
जो दिल में इतना प्यार जगाती है
जो समझ न पाए ये दिमाग
दिल से सब ये बताती है

इसलिए तेरी नजरो का
हर दम इन्तजार रहता है
ये दिल,ये मन
उसकी एक झलक को बेक़रार रहता है

इन आँखों को.
आंसुओ से यूँ न भिगोया कर
बहुत मीठे सपने है इनमें
उन्हें मोतियों की तरह पिरोया कर
फिर देख,जहाँ भर की खुशियाँ
इनमें बस जाएँगी
ये पहले की तरह ही
खिलेंगी,हसेंगी,मुस्कुरायेंगी …..

नज़रे …


कहते है नज़रे बयां करती है
हाल-ऐ-दिल का फ़साना
खुश हो दिल तो
गाती है जिंदगी का तराना
और दुखी हो मन तो
बहा देती है, दर्द बेगाना

पर उसकी आँखों में
एक अजीब सी ख़ामोशी है
थोडा सा दर्द है, थोड़ी ख़ुशी
थोड़ी सी मदहोशी है
जिंदगी के कुछ कडवे पल है
कुछ बिखरे सपने है
कुछ अधूरी ख्वाहिशे
और कही जैसे जगी सी बेहोशी है

वो जब नज़रे मिलाती है
दिल में गहरे से उतर जाती है
और फिर जैसे बना लेती है नाता
मेरे दिल से, मेरे मन से
मेरी आत्मा से, मेरे तन से

कही ये नज़रे ही तो नहीं
जो दिल में इतना प्यार जगाती है
जो समझ न पाए ये दिमाग
दिल से सब ये बताती है

इसलिए तेरी नजरो का
हर दम इन्तजार रहता है
ये दिल,ये मन
उसकी एक झलक को बेक़रार रहता है

इन आँखों को.
आंसुओ से यूँ न भिगोया कर
बहुत मीठे सपने है इनमें
उन्हें मोतियों की तरह पिरोया कर
फिर देख,जहाँ भर की खुशियाँ
इनमें बस जाएँगी
ये पहले की तरह ही
खिलेंगी,हसेंगी,मुस्कुरायेंगी …..

bade hote raste ….

lo main fir aa gaya ……. its exact 3 months,last post I wrote on 5th sept.Its 3 month past and I dont have much to say …hmmmm, I have….but,ok…..better to say I have many things …no no,let me think …..ya,yes I dont have much to share…..this is the correct statement,really i can never be a good writer…..damm !!! Anyways its not good to share personal things in public places.But In India generally ppl do it ;).Well life is going kewl,on pace ,on luv,on cell,on talk,on chat,on lappy,on bike, on cab…cab ?? me n car ??? no way …….I hate this word ‘car’ ….y?? go to abt me ……I olready have given so many reasons 🙂 …….I m harsh??? ya I m listening this words frm last friday nite …..ooops !! no sharing 😉

So,Wish/dream/desire …….I dont know da perfect word.bt simply ….I m da owner of Sony @ 700 SLR ……kimat na poocho yaro ……bada tanghal ho gaya 😦 lenders are invited …….chatni se roti kha raha hu ………hehehe !!! at least I m better to those who r eating with onions.I was there at my home on diwali.Its always good to be at home…. in small town also, things are changing rapidly……bade hote raste,chhote hote dil,badta internet network aur aapsi batein gul …….relations,emotions,love,everything vanishing too fast.But the tree in my garden is still giving shelter,may be because he is 50-60 yr old and keeping its moral with him ….ooh,serious toks !!! no no …..ok leave it too.The one thing I did in ma life first time is cancellation of tatkal ticket.But it repaid wid the biggest happiness of my life…..sharing ???

okay !!! lemme say sumthing on friendship …… i m always friendly wid everyone n I got good friends.last three months I got good experience about the friendship.Ppl say, time is the best way to evaluate the things.I think its not …..things/ppl change with time. because its time who change the circumstances,relations,priorities.So better way to judge the behavior of a person by his circumstances.May be the one u like most at moment,u hate on another moment cos he/she change his behavior towards you according to his/her priorities.well,last three months gives me chance to visit various places….starting from yellahgiri,dd hills,nandi hills,mysore,ooty,allapy,wayanad n many more…..my office is got shifted to Manyata(name sounds good) a worst and far place from my home house.daily 45 km riding was changing my hobby to majboori.So,I m availing cab service.I got a book “alchemy of desire”,I m forced to read it and I have completed its 23 pages in last one and half month.This shows my keen interest in reading books.Neways I like the first line of this book ‘Love is not the greatest glue between two people.sex is’…….but author ends after 518 pages with ”Sex is not the greatest glue between two people.love is’.Might be this is only the reason behind my speed.I already knows the last line den y should I read whole book…..par majboori hai bhai kya kare !!!

On poetry side …..u can see many new poems n ghazals on this blog.My request is to leave comments.cos,comment is the only thing which makes me to write….I m planning to buy Electra 350 …lets c,kab kanha ki meharbani ho ……..so its ol abt past 3 month….ab aap batao …ki hal hai tuhade?? 🙂

वो मेरे दिल में रहता है ….


ये कैसी बेकरारी है,
वो बस एक चेहरा समझता है
मेरी आँखों में वो
हीरे सा चमकता है
मैं उसके दिल में रहता हूँ
वो मेरे दिल में रहता है

दिनों को चैन नहीं मुझको
ना रातो को नींद आती है
उसकी यादों की तड़पन मुझको
इतना क्यों सताती है
मैं उसकी याद में पिगलता हूँ
वो मेरी याद में जलता है

उसकी आँखों में रोता हूँ
उसके होठो पे हँसता हूँ
खबर उसको नहीं लेकिन
उसके सपनो में सोता हूँ
पर कैसे कहू उससे
उसे मैं कितना प्यार करता हूँ ….

आखिरी सांस तेरे करार में

ना देना मेरे ख़त का जवाब, काफ़िर थोड़ी देर और तू,
कैसे कहूँ के कितना मज़ा हैं कासिद के इन्तजार में …

ना दिखा चाँद सा मुखड़ा,यू घूंघट की आड़ में
मेरे नैनो में जो बसी है सूरत,बड़ी बेकरारी है उसके प्यार में

ना मिल हर पल मुझसे यूँ,कभी तो जुदा भी हो
कह उस खुदा से तेरे,के चिनवा दे मुझे किसी मेहराब में

ना छू मुझको,तेरे सुर्ख होठो की लाली से
रहने दे कुछ वक़्त और मुझे, तेरी आहो के शरार में

ना जता हर पल प्यार मुझसे,ना मोहब्बत की यूँ सदा दे
मुझे भी तड़प उस आग की,के जलूं मैं भी तेरे इनकार में

मौत मेरी जिंदगी से हसीन हो,इतना सा ख्वाब है ‘शादाब’
दम निकले आगोश में तेरे,आखिरी सांस तेरे करार में

भूख !!!

आज फिर उसी ट्रेफिक सिग्नल पर
जहाँ पर आकर मेरी हर शाम रूकती है
कुछ दो तीन मिनट के लिए ….
और पढ़ा जाती है जाने कितने ही अनजाने पहलू

आज सब कुछ अजीब सा था
भीगा हुआ तन,कान में ईअर-फोन
मन में किसी का ख्याल…..
और तभी किसी ने आकर जैसे मुझे छुआ
नन्ही सी हथेली को आगे बढ़ा,वो बोली –
दो रूपये दे दे भाई,भूख लगी है

उसकी फाक सफ़ेद आँखें
जैसे चुनोती दे रही हो, सपनो को ठहरने की
उन बेजान आँखों में कुछ नहीं था
न कोई रंग,न कोई आस
कुछ था तो वो थी रोटी की भूख
और बारिश में और भी ज्यादा तेज होती पेट की आग

साथ में ख्याल
उस नन्हे से बच्चे का
जिसके शरीर पर कपडे की कुछ कतरने
जैसे शायद बारिश और भूख दोनों से लड़ने की
हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी

ये वही लोग है
जिनकी गाथा राजस्थान की मिटटी आज तलक गाती है
जिनकी सौगंध के किस्से
आज भी दिलो में जोश भर जाते है
जिन्होंने कसमें खायी थी,कभी न घर बनाने की
और न कभी मांग कर खाने की

आन की खातिर
जिन्होंने घास की रोटी तक खायी
वही आज चौराहों पर इज्ज़त बेच
दो जून की रोटी मांगते है

सच है, भूख इतिहास से बड़ी होती है
हर कसम से,हर वक़्त से बड़ी
हर एक एहसास और हर बलिदान से बड़ी होती है……

सर्द हवा का झोंका…..

11सर्द हवा का झोंका आया
साथ पुरानी यादें लाया
जब तेरी गोदी में रख सर
मैं बच्चे से सोया था
तेरे हाथो में हाथ पकड़
याद तुझे मैं कितना रोया था

तेरी आँखों में भी
अश्को की माला बिखरी थी
वो बूँद मेरे चेहरे पर गिर
दिल में कितना गहरा उतरी थी

फिर उस नरम हथेली का स्पर्श
जैसे गम सारे भुला गया
मैं नींद से जागा सदियों का
आँचल में तेरे सुला गया

फिर आँख खुली, और वो वक़्त के मंजर
छीने जिसने जीवन के हर स्वर
खोया हर पल मेरा, हर वो बातें
झूटी सच्ची जाने कितनी फरियादें

पर याद तो तेरी दिल में रहती है
जब सोचूं तेरे बारे में
तो चुपके से वो यूँ कहती है
हूँ साथ तेरे मैं, तेरे अन्दर
फिर क्यों कर तुझको रोना आया
सर्द हवा का झोंका आया …..

याद आने का सबब याद नहीं आता

कैसे कहू के तू अब या तब याद नहीं आता
याद तो आती है मगर,याद आने का सबब याद नहीं आता

किस हुनर से लूट लिया तनहा दिल को तुमने मेरे
वो चोरी तो याद है मगर,वो वक़्त याद नहीं आता

क्यों कर है इतनी मोहब्बत मुझको तुमसे
कोई राज कोई फ़साना याद नहीं आता

जब से आये हो जिंदगी में मेरे
कोई चारागर,कोई नासेह नज़र नहीं आता

क्यों कर पूछे है जमाना ‘शादाब’ तुझसे
जब वो जाने है के,तुझे कोई बहाना याद नहीं आता

उसकी आँखें सवालो जैसी

ढूंढता हूँ हर चेहरे में,चेहरा उसका
वो ख्वाबो में भी लगे है,ख्यालो जैसी

मेरे हर लफ्ज़ समझे है,लब पे आने से पहले
फिर क्यों है उसकी आँखें सवालो जैसी

लबों ने ऐसा जादू किया काफिर तेरे
जगे में भी रहे मेरी सूरत,सोनेवालो जैसी

भूल गया ये जहां,उलझ कर जुल्फों में तेरी
खुदा न बना पाया,कडिया तेरे बालो जैसी

कितनी तारीफ तेरे हुस्न की करे ‘शादाब’
वो दैर में बैठा ,हालत पीनेवालो जैसी !!!

कहो के इन्ताह है !!

इश्क में आशिक महबूब बन जाये,तो कहो के इन्ताह है
मोहब्बत आँखों से झलक जाये, तो कहो के इन्ताह है
वस्ल की सदिया, लम्हों में गुज़र जाये, तो कहो के इन्ताह है
हर वक़्त उसकी साँसों को जीने का जी चाहे, तो कहो के इन्ताह है
क्या लिखे ‘शादाब’ इन्ताह-ऐ-इश्क पर ग़ज़ल
गर लफ्ज़ ही न मिल पाए तो कहो के इन्ताह है …

कैसे कहूँ के कितनी मोहब्बत है

Love45454
कैसे नुमाया करूँ मेरे दिल के ये जज्बात
वो लफ्ज़ ही न बना पाया,जुबान बनाने वाला
[जुबान=language]

कैसे कहूँ के कितनी मोहब्बत है मुझको तुमसे
बस जानता हूँ के मुद्दतो में मिलता है, इतना चाहने वाला

पूछे है वो,इश्क की वजह रोज मुझसे दो चार
काफिर !! आज भी समझे है मेरा प्यार, वो ज़माने वाला

पास हूँ तो बीते है सदिया, लम्हों में मेरी
काश मिल जाये मुझको वो गुर, वक़्त चुराने वाला

मुस्कुराया तो बहुत मेरा सनम, ज़माने भर में
भाये है उसका मुझे हसीं अंदाज, वो रुलाने वाला

क्यों परेशां है ‘शादाब’, वस्ल की खातिर
तू खुदा तो नहीं,अहले-मुहब्बत को मिलाने वाला
[वस्ल=meeting,अहले-मुहब्बत=lover]

अब वीकएंड पर भी नहाने लगा हूं !!!

कहाँ थी कमी, और कहाँ था वक़्त, तेरे आने से पहले
तेरे चक्कर में ऐ जान-ऐ-जाना, अब काम से वक़्त चुराने लगा हूं …

ये कैसा सितम काफिर तेरा मेरे मोबाइल पर
कही बुझ न जाये ये चिराग, अब चार्जर भी साथ लेकर आने लगा हूं

आनी है दिवाली और दिल सफाई शुरू हुयी
मेरे दिल की चली न जाये बत्ती, तुझे दिल में जलाने लगा हूं

तेरे बदन से जो खुशबु महके और शमा रंगीन हो
कुछ तो भला किया तुने सनम,अब डीओडोरेंट के पैसे बचाने लगा हूं

तेरी बातो से फुर्सत कहा और तेरी यादो से वक़्त
जी भर के देखू तुझे,इसलिए अब वीकएंड पर भी नहाने लगा हूं

अब न कहना के बहुत अमीरी है तेरे मिलने में
यहाँ लुट चुका हूं मैं , बस कड़ी कोशिश से गरीबी छुपाने लगा हु

मेरी कविता इतनी फर्जी भी होगी,सोचा न था
देख तेरी मोहब्बत में मैं,क्या क्या क्या क्रेप गाने लगा हूं

ले, आज फिर एक कविता तेरे नाम कर दूँ


जब से आये हो जिंदगी में मेरे
चमन को बहारो का मतलब याद आया
दिल कहे, जीवन की ये बगिया तेरे नाम कर दूँ
ले, आज फिर एक कविता तेरे नाम कर दूँ

पूछे है पगली, याद करते हो मुझे
कैसे कहू, हर शब्-ओ-सहर तेरी याद में डूबे है
हर वक़्त जो दिल धडके है तेरी खातिर, उसकी हर शाम तेरे नाम कर दूँ
ले, आज फिर एक कविता तेरे नाम कर दूँ

हर सुबह का आगाज़ तुम्ही से
हर शाम तेरे नाम से ढले
हर जाम से पहले कहू ‘बिस्मिल्लाह’,हर वो जाम तेरे नाम कर दूँ
ले, आज फिर एक कविता तेरे नाम कर दूँ

वो रोये है तो बरसे है बादल इधर भी
हँसे है तो खिले है फूल इधर भी
तेरी हर मुस्कराहट पर,ये मेरी जान तेरे नाम कर दूँ
ले, आज फिर एक कविता तेरे नाम कर दूँ

सन्देश दीक्षित

लफ्जों में बयां करूँ कैसे

.
वो पूछे है,के याद करते हो मुझे
काफिर!!सोज़-ऐ-दिल,लफ्जों में बयां करूँ कैसे
[सोज़=pain]

वो देखे है,अक्स-ऐ-खुदा मुझमें,मैं उनमें
पिजीराफ्ता-ऐ-मोहब्बत जबां करूँ कैसे
[पिजीराफ्ता – accepted]

वो रोये है वहा,शररबार इधर बरसे
उसके हर इक गिरिया का हक़ अदा करूँ कैसे
[शररबार =raining sparks of fire,गिरिया=tear]

ये माना के ना वस्ल-ऐ-यार होगा कभी
पर इस दिल को तेरे दिल से जुदा करूँ कैसे
[वस्ल=meeting]

— सन्देश दिक्षित

मुझे कल पर मेरे ऐतबार है कोई ?

.
ये मसरूफियत है या नावाकिफ तेरे
पर जो भी है दिल-ऐ-फुगाँ है कोई ?
[मसरूफियत=busy,नावाकिफ=not aware,फुगाँ=spear]

ये इज़्तराब है गुफ्तगू का मेरे
वो काफिर समझे है,या तगाफुल है कोई ?
[इज़्तराब=restlessness,गुफ्तगू=talk,तगाफुल=ignorance]

बहुत उस्तवार है ज़िस्त-ऐ-तुलानी में अपने
मुझे कल पर मेरे ऐतबार है कोई ?
[उस्तवार=proud,ज़िस्त-ऐ-तुलानी=length of life]

कब पिगलेगा बुत,दिल-ऐ-जज़्बात पे मेरे
वो दिल है,या संग-ओ-खिस्त है कोई ?
[संग-ओ-खिस्त=brick of stone]

— सन्देश दिक्षित

PS – For hindi version of this nazm click here

Meaning less words

Uff……what shoud I right? Even I dont have RSS feed on my blog,still ppl ask aajkal tum likhte nahi ho …really ppl r freak to read meaning less things.This time also dont expect that you will find anything which will contribute to your knowledge in any sense.Last 20 days was full of experience.I got …how ppl make use of others emotions? How you can ride a puncture bike?how you can write documents without any reference?How you can choose your life partner?How to cook bisibelle bhat? and the most interesting how to crack farmville on facebook? Lets make this post as continuation of previous one 😛

four-ppl-four-thoughts was the story of better to say my judgmental theory on four gals.Among them one is happily doing her marriage shopping,other one is fighting with her parents cos they want to marry her n she dont believe in this social concept,third one(will tell u later) and the last one is still confused let her remain the same :).

The traveling is still filling happiness in my core,dont know how long it will work.Last weekend I was at nandi hill.This was the 5th time when I was there.Surya maharaj still angry to me and in this shot also he was not agree to give darshan simply I missed famous sunrise this time too.Might be the reason that I hav Sun with Rahu in my lagn house :D.Had a plan for wayand,but bikers wer more scared with rain so left.Someone has rightly said akela chana bhad nahi bhooj sakta …. 😛

Ghazal listening is replacing many old stuffs from my music loving architecture.Iqbal bano is the new name.Ghalib is all time favorite which forced me to do what I dont want.I hate reading ….but Deewan-e-Ghalib is exception.I have its rare hindi softcopy ……interest ppl can mail me.Shayari is on full sabab. My chatfrnds used to see new caption every hour ….frnds I cant help,you have to bear.A new edition on classical side is Rag Sehra …..

No..no I m not at all …….What ? You said something ? 😛 Ohkay ….Love aajkal and Kamine havnt left any impression…..yes Lali character in Agle janam mohe bitiya hi kijo,real name Ratan Rajput has something which we call values,that r the thing which i really appreciate in a girl…gr8 sense of humor,intelligence….looks matter?? I m in search :P.She came on the set of Dus Ka Dum…ppl who have seen,can judge.

Aur unke liye jo kehte hai ke aajkal hum kuch likhte nahi hai…….arz kiya hai

jis chorahe par lagte they hasino ke mele
us dagar par ab tum kabhi milte nahi ho
kafir !! fir poochte ho ke tum likhte nahi ho
😀

Abhi islah karna baki hai …..puri hone par pesh-e-khidmat karunga …hehehehe

I told you na kuch nahi paoge …. par padna hai …….meaning in less words 😛

Bangalore to Shivasamudram

3P is my interest,my hobby and my passion……3P(People, Product and Process) basically a concept of six sigma TQM and industry is adopting it to improve their quality.The same funda I am applying in my life to make it more meaningful.But here the meaning is little bit different….3Ps here …Places,Person and Parmatma.All three are inter-related and after getting first one,you can reach rest two.Place gives you a chance to meet person and interacting with person you can easily meet with Parmatma.But,you cant say that your search ends up, cos it cant be.No,no………I m not going to be spiritual or philosophical.Actually I was not finding any other better way to start with.

I am not a travel blogger.Even I am not a blogger as I always claim.Then why the hell I am doing this now.Reason…..cos,This one was my last trip ………ooo ok,no no ………I m still alive.A simple reason that my journey now comes to end,I have covered almost every places resides in Karnatka.Shivsamundram was the last.The above darshnik vichar still valid here that you cant get anything full.Now I m looking towards Kerala.Its monsoon and a good time to visit heaven.So waiting for this weekend.The plan is already sealed.hey…….all the readers who are coming here by the bloody google links,cant find anything.Seriously I am not interested to write anything about the beauty or the way of Shivsamundram from bangalore.Only what I can say that,this is a must visit place.Bike nikalo,jacket pehno….and you will reach in 3 hrs.Take any road,either Kanakpura or Mysore.But I prefer kanakpura cos its staright goes to Shiv-Samundra.No right no left…….If you take mysore highway,take left after Mandya.
DSC02696

Two beautiful falls(Gagan Chukki nad BaraChukki),Kaveri rivar and a power project.A beautiful and sure shot spot to suicide.So If you truly thinks that “Yaha kon hai tera,Musafir….“,Go to Barachukki,get down little bit,You can find two rocks,jump from there and its guaranteed assured by Wadyar kings that you will meet the Paramtma.I was not so lucky ,I tried with one rock but a stupid fellow hold me.A suggestion,have kabab from Ali kabab Center which is just in front of a mosque situated on the top of the hill.Kabab is deadly tasty and gives you a reason to suicide.

After Barachukki you can visit to Talakad.A cursed place for cursed people like me.By returning from Barachukki there is a diversion towards left,dont take it …..this goes to hell.take next right which is almost 5 km far from this place.On the way you can find one and only petrol bunk in the circum of 20km.On the second left you will find a smooth road but after 5 km the reality start.This is just like a lie,Its looks beautifull but after some time its makes your life worst.After 15 Km on this road you will reach on a junction.Now,You have to decide,you want to go Somnathpuram or Talakad….Ek taraf uska ghar, ek taraf Meh-kada.You can find beer on talakad …..somnathpuram is a temple,ppl says its built on 3000 yrs ago.

Barachukki is a state of man’s ebullience and Talakad is immanent state.The water is same on both the place.But the behaviour is different.Can this compared by our man??

There are five temples in Talakad,but You cant see them ….they are burried in sand.Ppl says that this was the curse fromKing’s wife.But its good to see desert,100 mt aways from great Kaveri.Both can live together Water and desert……But in our life,we want only water where the hell desert should go !!!

Four ppl four thoughts

Last week I was little bit free from all of my assignments and had enough time to make new frnds as I am always curious to know about diffent people and their personality.As I have stong believe that you can find a guru anywhere in anybody.Getting new views about the life and the way of living is new hobby which I am seeing that developing in me.In last 4-5 days I was in touch with four new frnds obviously the mode is Orkut and Yahoo IM.Luckily all four are girl:).All four have different views towards life but two have little bit same thought as both are have same origin of thoughts.Let me introduce them…..I am hiding their name…otherwise they will spammed my blog (all are computer tachie).Ok…..let me give a shot

First one is Jugni…..full vella type.Chating is her passion.Daughter of an Army officer,based at delhi.Totally dilli marka………having many new words which were not present in my dictionary before….Chipaar,****.She sleep when people wakeup and she opens her eyes when people usually on bed.Fashion designer by profession and have a contract for my marriage.Had a boyfriend and now having a strong believe that he will again make her life happy.She is not a Typical Indian sati savitri but having some principles towards life and respect indian culture values.I met her on solar eclipse night (morning for her).A sher for her”Ab main samjha tere rukhsar par til ka matlab,dault-e-husn par pahredar bitha rakha hai”.She hate urdu which I like at most.Still she dont know how to make roti ….how can I marry her 😛

Second one is Mohini.Very well impressed with Osho’s thoughts.3-4hours meditation is a regular activity of her day.A graduate,working with a marketing firm.A smiling face which gives u a reason to hang with her.She is also from delhi and waiting for Nov like me ….as we both are going to marry in this Nov.No,no …….there is a catch,only the person are different to whom we are getting marry.Strong believer in meditation and having a ear for indian music.She is strongly affected with Osho’s thought and trying to live with them but also using her instinct to decide what to do.This is the way which i think every one should have.

Third one is Anandi,Gives you lots of options to call her ……..she have lots of name.A married lady and a school teacher.Living in chandigarh and claims that she is living as sanyasin ………an OSHO sanyasin.Came to know from her that Osho sanyasis are different from the definition which we have in our memory discs.Thinking that nobody can stop her to do anything what she wants to do.These thought come when you cross some of the states of sprituality and also when you doesnt understand sprituality.Believe in Ekla Chalo but in a different manner.Lots of things to tell about this personality but still im trying to understand.Well,She is the only girl who gives me challenge……I love when some one trying to attack on my roots of thoughts.Anyways a strong supporter of Live-in relationship….But seriously,she has patience in her core.

Fourth one is Pushpa…….No,Not Amarprem wali,She is an engineering graduate and having a eye on IAS.Cleared Pre and moving towards Mains.An Indian litrature fan and belongs to Chattisgarh.I get in touch When I was searching for Rag-Darbati,A book written by Shrilal Shukla.Little bit confused girl and gets irritate when something goes out of his thoughts.Having a great respect towards Indian culture and keep herself in her domain.

All four girls are from same country and having different views.But the common thing,they have is “respect”.Respect towards theirself,respect towards religion and respect towards me.A week and four personlity really makes me to think, who is the better and who is best.But,It feels good when you see that really we are growing with our thoughts.

LGBT and Hinduism

On 2 July 2009, Delhi High Court court ruling decriminalised homosexual intercourse between consenting adults was and adjudicated Section 377 of the Indian Penal Code to be conflicting with the fundamental rights guaranteed by the Constitution of India.Morden people support this act and having lots of reason behind it but still they have queerphobia and dont want to like himself to be called as a Gay or Lesbian …Most of the debate on the media watever it is ,talked about homosexuality I am fully against with this law and believe that these relationship only will ruin indian culture.Now, someone is coming with the question that why prostitution should not be allowed even it also cleared all the constraints which were in the
homosexuality.Even people asking that they love their pet and cant live without him then why dont they do sex with him 😛 ….

Ok I am not going to be biased ….I got some information.Lets talk about the LGBT (lesbian, gay, bisexual, and transgender),What a technical word …looking that they are working on latest technology …..anyways,In India people hear this word when Meera Nair came with her movie”Fire”.some of the states banned that movie
So,I didnt get the chance to see at that time.but,i was there in Banaras when it was shoot.After that Girlfirend” came …superflop !!!

I have some example which are given by those LGBT ppl about hinduism to support their concept

1. Ardhanarisvara
-LGBT say this means half male half female – But , It is interpret as “advait” priciple which tells that He alone is the cause of the entire existence “shiva” and “shakti”.Rigveda acclaims, ‘He, who is described as male, is as much the female and the penetrating eye does not fail to see it’. The Rigvedic assertion is explicitly defined. The male is only so much male as much he is female and vice versa the female is only as much female as much she is male. The maleness and femaleness are the attributes contained in one frame.

2.Following three examples are related to Vishnu Avatar “Mohini” .this was not the transaction but it is a seperate Avatar Mohini.So,no need to clarify

a. Aravan (a hero whom Krishna married after becoming a woman);
b. Ayyappa (a god born from the union of Shiva and Mohini, a female incarnation of Vishnu);
c.Harihara (Shiva and Vishnu combined);

3. Chaitanya Mahaprabhu (an incarnation of Radha and Krishna combined) -> for this I can suggest LGBT to go and read “Chaitanya Charitamrita”.for brief Chaitanya Mahaprabhu was an avatar of Krishna in the mood of Radharani.

4. Gadadhara
(an incarnation of Radha in male form)-> was also an associate of

So,before pointing to Hindu narrative tradition,people must have to go through to the facts and then express themselves.Even in hindu law code “Manu Smriti” there are many punishments for certain instances of male and female homosexuality.If a stri [adult woman] was found having sexual relations with a kanya [unmarried girl], for instance, her “head should be shaved immediately or two of her fingers should be cut off, and she should be made to ride on a donkey.” If two kanya have sex, each “must be fined two hundred (panas), pay the double of her (nuptial) fee, and receive ten (lashes with a) rod.

The Narada Smriti,forbids the marriage of homosexual men (mukhebhaga – men who perform oral sex on other men) to women: “These four [irsyaka, sevyaka, vataretas, and mukhebhaga] are to be completely rejected as unqualified for marriage, even for a woman who has been raped.”

So,Do whatever you want ,but dont relate Hinduism with your act……. Be happy LGBT, I can only pray for you 🙂

Retrieve deleted post on wordpress or blogspot

I was moving some of post related to Ghazal from this blog to my another blog .while doing it I deleted some of the post which are not related to Ghazal and urdu shayari ……searched net for retrieving the deleted post .I found some useful method ,but the good one is

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8. That’s it!

Enjoy !!!

You are Bangalored ….

Bangalore is getting  more popular nowadays,not for its IT resources.But, becoming a synonym of outsourcing and lay off.Below is the result which I found on dictionary.com

Main Entry: bangalored
Part of Speech: adj
Definition: laid off due to outsourcing, esp. outsourcing to India or other parts of Asia
Example: Most of the department was bangalored–their jobs have moved to India.
Etymology: fr Bangalore’s reputation as a high-tech city
Usage: slang

ZooZoo – What an Idea Sir Ji !!!

Last time they came up with cute little pug “Cheeka” and the young boy with the most verbalized slogan ‘Where ever you go, our network follows’ but now there are a whole lot of new ideas and creativity.Have you remember the little pug who always comes to help of a little girl.This is the support Hutch want to give for their customers ,proving their tag line “Happy to help at your doorstop“.

Now the Idea change – they are now with a new Animated character ZooZoo.No,they are not animated infact they are slim girls of Mumbai theater.The design of thin limbs, contrasted with big bellies and a bulbous head, all add to the illusion that these creatures are ‘smaller’ than humans.The films were shot by Nirvana in Cape Town, South Africa, with the help of a local production house there, called Platypus.The same combination of people also worked on the ‘Happy to Help’ series.

This is the pure Indian Idea with famous Indian Jugad which is always proved out of text books.The director Prakash Verma took 3 weeks to complete series of 30 ads.the costume is made of a material called perspex and the total cost of the campaign is jus above 3 cr. Now,Abhishek have to say “What an Idea Sir Ji “.

Slumdog slugfest

“If ‘Slumdog Millionaire’ projects India as Third World dirty underbelly developing nation and causes pain and disgust among nationalists and patriots, let it be known that a murky underbelly exists and thrives even in the most developed nations,” Amitabh slammed Danny Boyle on Slumdog Millionaire.People criticized Amitabh on his comment by saying that we should not ignore this part of our country.But,Is there any thing which slumdog changed……No,nothing …..just one thing that now the image of India getting more worst. What the so called first and second world think about India? Is India the place where you can find Naga Sadhu,Old fort,temple and the crowded market …….really?? Not at all, We are the biggest software exporter,we are nuclear power,we are the biggest market of US ,we are largest democracy,we have second largest army,we have second most growth rate in the time of recession …then why media want to present Bharat as a poor,manner less,dirty country…….. Every family want to hide their family problems to others, they never share it.It doesnt mean that they dont want to solve it .But, when it comes to country ppl changed there view …they want to show it to the world .

Now Sun creates a new drama …..they did a string operation on Rubina’s dad .All media aired it on the high priority …… selling the children is not new in India and in so called developed country too.But,ppl are more interested to show it ….now google have 46,000 result for slumdog rubina sell ……..Is this the Bharat which we want to project ??

IPL 2009 – Curtain Raiser

Modi is the famous surname in India Nowadays. One is Narrendra (future PM and CEO) and the other one IPL CEO lalit Modi. In last 4-5 month Lalit showed his power of money and the position ,every state Govt were begging to organize the matches ,but Modi sahab ke man mein to kuch aur hi tha.

Shahrukh was the most profitable team owner.He has a list of sponsors,it gives a trick to Shilpa ,who is only mard in the Indian women film industry . She has taken a mardana kadam and took stake in the Rajasthan Royal . Now beloved Yog Guru Shilpa Shetty is halla boling with Shane warne .

The origin of Cricket is England.All the countries which were rules by Britishers are doing well in Cricket.So its responsibility of IPL to give honour to England team,thats why they are giving $1.55m to both Peterson,Flintoff even when the last time England board refused to participate.That is what we called Swamibhakti .Peterson is the most costly player .Dhoni is the most valuable among Indian Cricketer players.

Pakistani players not allowed in this session because they are busy in making bombs and doing amendments in the constitution for shariyut law. But some Talibani contacted IPL to give a chance. Pakistan team wants some modification in the pattern of cricket.They want that ball should be replaced by hand grenade and bat should be replaced by Rocket Launcher.

Exit poll India – 2009

Exit poll is banned in India because it may affect the next round of election .following is the prediction i made before starting of election . You can also contribute with your prediction and suggestions.

I m not predict anything for NDA/UPA . Cos still it is not clear who is going with whom 😉

Congress – 117
BJP – 148*
NDA Ally – 50 ( including JD(U)+AJP+INL+SS+BJD+AKALI+TRS)
UPA Ally – 36 ( Including RJD+LJP+NC+PDP+JMM+NCP)
Others – 189 ( Left + BSP + SP + TDP +Others )

* 2 seat are wrongly added in punjab

Election 2009 – A Prediction

Loksabha election is going be to held in this month , Every one is predicting results with opinion poll or with their experience. I also have digged some data of previous Assembly and parliamentry election results and trying to relate it with the new circumstances and the possibilities .

Some of the factors are taken in consideration –
1. Varun Gandhi’s statment
2. Jernel Singh’s Shoes 😉
3. Chiranjeevi’s Mayajal
4. Sharad Pawar chale PM ban ne
5. Shri Ram sena ka Ram ban

.

I m not predict anything for NDA/UPA . Cos still it is not clear who is going with whom 😉

Congress – 117
BJP – 150
NDA Ally – 48 ( including JD(U)+AJP+INL+SS+BJD+AKALI+TRS)
UPA Ally – 36 ( Including RJD+LJP+NC+PDP+JMM+NCP)
Others – 189 ( Left + BSP + SP + TDP +Others )

Anjali Waghmare – Is this another popularity stunt ?

I really do not understand the system of Law in India, a terrorist who is responsible for committing a heinous crime killing over 150 people is seeking a Lawyer to save himself, This is really ridiculous even to think of this kind of judgement being given to the TERRORIST who should be hanged till death after his conviction.The person who can kill so many people by not caring anything is still sitting behind the bars after he found guilty of such a big crime.This is not acceptable by Our Society, One can only imagine after hearins this news what would be the plight of those who have lost their relatives in the terror attack.This is a big shame for Our Constitution and Law.

How can we deal with this inhuman animal with humanity or even think of human rights for him. He and his colleagues have played the bloodbath drama on our streets under full glare of the poor Indians and the entire world. It is strange how we are soft footing a terrorist who is directly responsibile for the death of country’s top police officers plus over 180 uncared for Indians. Enough is enough, this idea of acting chummy to this mother-*&^% will sink the ship of ruling party in the Center. Pranab looks like he is indebted to Pakistan for his life with gratitude for whatefer reason along with his mentors. Please just hang Qassab, only this will ease the agony and quench the fire in our veins.

Can I ask to Anjali Waghmare that will she defend a culprit of her mother’s killing or rapist of her sister/daughter ??जो लोग भारत की अस्मिता का बलात्कार कर चुके है उनके लिए लड़ना छोड़ दो ,इस दुनिया में इस से गृह्नित काम हो नहीं सकता .Anjali if u r a true Indian , you should withdraw ……If u have a little bit emotions with the relatives of victims …..dont do it.

Lok-Ok-ti

Lokoktiya(Proverbs) are the symbol of Indian village philosophy .This is the art to describe long experience in short sentance. These are based on some basic truth or practical precept .An African writer have said ” Proverbs are the daughters of experience.”

My effort is to accumulate all available ( may be not in write-up) on a single place . Please contribute…..

So , here I started with some proverbs which I usually listen from my Ma …..

1. पुरखा तो मर गए कुवारे , नातिन के नो नो व्याह
( पुरखा = fore-fathers , व्याह = Marriage )

2. नादिदे को खसम आयो , धोरी दुपहरी दियो जोडो
(नादिदे = Greedy ,खसम = Husband , दियो = Lamp )

3. के तो पहनू साडी ,नहीं तो डोलू मूंड उघाड़ी
(मूंड = forehead )

4. गधा कु दियो गुलकंद , मेरी आँख फोड़ डाली
(गुलकंद = Rose petal jam)

5. नचनिया ने पहनी पीतर , बाहर जाऊ के भीतर
(नचनिया = Dancer , पीतर = Bronze)

6. बाबाजी को सल्लम सोटा , ले गए गोरा पारवती

Expecting more proverbs from ur side ….mail me @ sandesh.ec@gmail.com

शमा हर रंग में जलती है सहर होने तक

आह को चाहिए इक ‘उम्र असर होने तक
कौन जीता है तेरी जुल्फ के सर होने तक ?

दाम हर मौज में है हल्का-ऐ-साद_काम-ऐ नहंग
देखें क्या गुज़रे है कतरे पे गुहर होने तक
[ दाम = net/trap, mauj = wav-e, हल्का = ring/circle, साद = hundred,
नहंग = crocadile, साद_काम-ऐ नहंग = crocadile with a hundred jaws, गुहर = pearl ]

आशिकी सब्र तलब और तमन्ना बेताब
दिल का क्या रंग करुँ खून-ऐ-जिगर होने तक ?
[ सब्र = patience, तलब = search ]

हम ने माना के तग़ःअफ़ुल न करोगे , लेकिन
ख़ाक हो जायेंगे हम तुमको खबर होने तक
[ तग़ःअफ़ुल = neglect/ignore ]

परतव-ऐ-खुर से है शबनम को फना की तालीम
मैं भी हूँ इक इनायत की नज़र होने तक
[परतव-ऐ-खुर = sun’s reflection/light/image, शबनम = dew,
फना = mortality, इनायत = favour ]

यक_नज़र बेश नहीं फुर्सत-ऐ-हस्ती ग़ःआफ़िल
गर्मी-ऐ-बज्म है इक रक्स-ऐ-शरार होने तक
[ बेश = too much/lots, फुर्सत-ऐ-हस्ती = duration of life,
ग़ःआफ़िल = careless, रक्स = dance, शरार = flash/fire ]

ग़म-ऐ-हस्ती का ‘असद’ किससे हो जुज़ मर्ग इलाज़
शमा हर रंग में जलती है सहर होने तक
[ हस्ती = life/existence, जुज़ = other than, मर्ग = death, सहर = morning ]

मेरी जान को करार नहीं है

आ,की मेरी जान को करार नहीं है
ताक़त-ऐ-बदाद-ऐ-इंतज़ार नहीं है
[ करार = rest/repose, बेदाद = injustice ]

देते हैं जन्नत हयात-ऐ-दहर के बदले
नशा बा-अंदाजा-ऐ-खुम्मार नहीं है
[ हयात = life, दहर = world, बा-अंदाजा = according to,खुमार = intoxication ]

गिरिया निकाले है तेरी बज्म से मुझ को
हाय ! की रोने पे इख्तियार नहीं है
[ गिरिया = weeping, इख्तियार = control ]

हमसे ‘अबस है गुमान-ऐ-रंजिश-ऐ-खातिर
ख़ाक में उश्शाक की गुबार नहीं है
[ ‘अबस = indifferent, गुमान = suspicion, रंजिश = unpleasantness,ख़ाक = ashes/dust, उश्शाक = lovers, गुबार = clouds of dust ]

दिल से उठा लुत्फ़-ऐ-जलवा हाय मायने
घिर-ऐ-गुल आइना-ऐ-बहार नहीं है
[ मायने = meanings, घिर-ऐ-गुल = blossoms ]

क़त्ल का मेरे किया है ‘अहद तो बारे
वाए ! आखर ‘अहद उस्तुवार नहीं है
[ ‘अहद = promise, बारे at last, उस्तुवार = frim/determined ]

तूने क़सम मयकशी की खाई है ‘ग़ालिब’
तेरी क़सम का कुछ ‘ऐतबार नहीं है !
[ मयकशी = boozing, ऐतबार = trust/faith ]

दीया है दिल अगर उसको ,बशर है क्या कहिये …

I was searching for gazal on the web ………..but most of the I found in the hinglish, Its odd to read urdu in english font .So,I just started rewrite them in their original font,as I think its help me and may be for others also to learn urdu easily ………..I am also including the meanings of some tough words ……… Lets enjoy first gazal on my blog ……….. please do keep writing comments ….

दीया है दिल अगर उसको ,बशर है क्या कहिये
हुआ रकीब तो हो ,नामाबर है ,क्या कहिये
[बशर=आदमी ,रकीब=प्रतिस्पर्धी ,नामाबर = संदेशवाहक ]

ये जिद की आज न आये ,और आये बिन न रहे
कज़ा से शिकवा हमें किस कदर है क्या कहिये
[कज़ा =भाग्य , शिकवा =शिकायत ]

रहे है यो गह-ओ-बे-गह की कू-ए-दोस्त को अब
अगर न कहिये दुश्मन का घर है ,क्या कहिये
[गह=समय ,कू-ऐ-दोस्त = दोस्त की गली ]

ज़ह-ऐ-करिश्मा की यों ,दे रखा है हमको फरेब
की बिन कहे उन्हे सब खबर है ,क्या कहिये
[ज़ह=बचपन ,फरेब=दोखा ]

समझ के करते है बाज़ार मैं वो पुर्सिश-ऐ-हाल
के यह कहे की सर-ऐ-रहगुज़र है ,क्या कहिये
[पुर्सिश=जानकारी,सर-ऐ-रहगुज़र=सड़क पर ]

तुम्हें नहीं है सर-ऐ-रिश्ता-ऐ-वफ़ा का ख्याल
हमारे हाथ में कुछ नहीं है ,मगर है क्या ,कहिये

उन्हें सवाल पे ज़ोअम-ऐ-जूनून है ,क्यों लड़िये
हमें ज़वाब से कता-ऐ-नज़र है ,क्या कहिये
[ज़ोअम=गर्व,कता-ऐ-नज़र है=नज़र अंदाज़ ]

हसद सजा-ऐ-कमाल-ऐ-सुकून है,क्या कीजे
सितम,बहा-ऐ-मता-हुनर है ,क्या कहिये
[हसद=दुश्मन,बहा=कीमत,मता=कीमती ]

कहा है किसने की ‘ग़ालिब’ बुरा नहीं लेकिन
सिवाय इसके की आशुफ्ता-सर है ,क्या कहिये
[आशुफ्ता-सर= दिमागी बीमार ]

— ग़ालिब

Diplomacy outsourcing by Pakistan

Its common to see outsourcing of business but now Pakistan is outsourcing his diplomacy to China ,He is doing cheap politics about bringing china as mediator for Mumbai blast incident. They simple acting as childish behaviour…

Pak to China : Papa papa india thinks i stole his lollypop but i just borrowed it and ate it and never was held accountable of making the mistake I am not stealing I swear.
China to Pak : ooh kiddo I told you come to me only when there is an aligator in your pajamas (read satellite images confirming terrorist camps in pak) okay give me all the change in your piggy bank and I will go to delhi.

dharam arth samjhau kya ?

This poem was written on the reaction of a debate “Religion and cast” on one my frnds blog.Few was rigid for their stand that there is no need of religion and caste . I have done everything to make them understand that its necessary for our culture and our social system ,but all wer waste …. so here is something for them

जो रक्त से सना नहीं ,जो रक्त में बहा नहीं
उसे रंगे-खून दिखाऊ क्या
उसे धरम अर्थ समझाऊ क्या

जिन्हें न मतलब ध्यान से
न गीता से ,न कुरान से
उसे वेद पुराण पड़ाउ क्या
उसे धरम अर्थ समझाऊ क्या

जिसमें भावः न ,न भक्ति है
न सुनने की ही सकती है
उसे मंत्र श्लोक सुनु क्या
उसे धरम अर्थ समझाऊ क्या

जो कुतर्को से भरे पड़े
पाश्चात्य में रंगे पड़े
उन्हें तर्क वितर्क बुझाऊ क्या
उसे धरम अर्थ समझाऊ क्या

Ye jaruri to nahi

मेरे हर लब्ज़ शब्दों में बया हो , ये जरुरी तो नही ,
दिल के हर जज्बात आँखों में समां हो , ये जरुरी तो नही ,

मुमंकिन है हर दर्द को दिल में छुपाना भी
हर रिसते ‘अश्क’ से भीगे पलके , ये जरुरी तो नही ,

जिसकी मोहब्बत में ,मैं कुछ भी कर गुजर जाऊंगा 
उसे भी मुझ पर हो इतना यकीं ,ये जरुरी तो नही ,

जिसकी यादो में , मैं रात भर सोया नही शायद
उसके ख्वाबो में भी हो मेरा इन्तजार ,ये जरुरी तो नही,

हर वक्त खायी थी जिसने साथ मरने की कसमें
वो दे जिंदगी में भी साथ , ये जरुरी तो नही …..

Satyam Fraud, Satyam share down 78% after Raju’s resign

In a letter to the Satyam board members, Raju said that the company reported inflated revenues over years. He said that he feared takeover due to poor finance performance.

Coming clean on financial irregularities, he said that the company had Rs 1,230 crore worth of understated liability as of September 30.

His decision was conveyed to the company’s board members. The company was supposed to hold a board meeting this Saturday.

Even since announcing the controversial Maytas deal, Raju was under pressure from investors as the decision raised issues over corporate governance.

In a dramatic revelation, Raju said that the balance sheet has inflated cash & bank balance of Rs 5040 crore. No board member had any knowledge of the real situation as against books. The balance sheet was inflated and accrued interest of Rs 376 crore in the books is non-existent.

He said in the letter that Rs 1230 crore was arranged to Satyam, which is not reflected in books. Ram Mynampati will act as interim CEO. Merrill Lynch can be entrusted to explore the merger options. Raju asked auditors for restatement of accounts in the light of new facts.

Raju in his letter further said that the Q2FY09 reported revenues of Rs 2700 crore Vs actual revenue of Rs 2112 crore. The Q2FY09 operating margin reported was Rs 649 crore against Rs 61 crore. The Q2FY09 numbers had Rs 588 crore of artificial cash in books.

Find Satyam’s chairmen resignation letter  -> satyam_computer_services_ltd_07010911